28 अप्रैल 2026 : हरियाणा में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शिक्षा विभाग की कथित लापरवाही के कारण करीब 400 करोड़ रुपये का बजट लैप्स हो गया। इस बड़ी चूक के चलते राज्य में कई विकास कार्य अधर में लटक गए हैं, जिससे छात्रों और शिक्षण संस्थानों को सीधा नुकसान झेलना पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, यह बजट स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नई सुविधाएं विकसित करने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए आवंटित किया गया था। इसमें स्कूल भवनों की मरम्मत, नए कमरे बनवाने, स्मार्ट क्लासरूम तैयार करने और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था शामिल थी। लेकिन समय पर बजट का उपयोग न होने के कारण यह राशि वापस चली गई।
बताया जा रहा है कि विभागीय स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी, फाइलों का लंबित रहना और प्रशासनिक सुस्ती इस पूरे मामले के मुख्य कारण हैं। कई परियोजनाएं कागजों में ही सीमित रह गईं और जमीन पर उनका काम शुरू नहीं हो सका। इसके चलते न केवल विकास कार्य प्रभावित हुए, बल्कि सरकार की छवि पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों से इस संबंध में जवाब-तलब किया जा रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च क्यों नहीं हो पाई। उच्च स्तर पर इस मामले की समीक्षा की जा रही है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। जब बजट होने के बावजूद उसका सही उपयोग नहीं होता, तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और सुविधाओं पर पड़ता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल, जो पहले से ही संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं, उन्हें इससे और ज्यादा नुकसान होता है।
अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े लोगों ने भी इस मामले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सरकार को शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस तरह की चूक नहीं होने देनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
इस बीच, कुछ अधिकारियों का कहना है कि बजट के उपयोग में तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें आई थीं, जिसके कारण समय पर कार्य पूरे नहीं हो सके। हालांकि, यह तर्क भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि इतने बड़े स्तर पर बजट का लैप्स होना एक गंभीर प्रशासनिक विफलता माना जा रहा है।
सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि इस मामले की विस्तृत जांच करवाई जाएगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में आवंटित बजट का समय पर और प्रभावी उपयोग हो सके।
फिलहाल, इस घटना ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस मामले में क्या कार्रवाई होती है और क्या सरकार इस स्थिति से सबक लेकर सुधारात्मक कदम उठाती है।
