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ड्रग जब्ती के मामलों में पंजाब देश में दूसरे स्थान पर, राजस्थान सबसे आगे

29 मार्च 2026  देशभर में नशे के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक अहम खुलासा सामने आया है, जिसमें पंजाब ड्रग जब्ती के मामलों में देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बनकर उभरा है। केंद्रीय एजेंसियों और गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में भारी मात्रा में नशीले पदार्थों की बरामदगी हुई है, जो इस राज्य में नशे के बढ़ते नेटवर्क और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई दोनों की ओर इशारा करती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 से 2025 के बीच ड्रग जब्ती के मामले में राजस्थान पहले स्थान पर रहा, जहां सबसे ज्यादा मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए गए। इसके बाद पंजाब का नंबर आता है, जहां इस अवधि में करीब 2.10 लाख किलोग्राम से अधिक ड्रग्स जब्त किए गए।

विशेष रूप से वर्ष 2025 में ही पंजाब में 1.16 लाख किलोग्राम से ज्यादा नशीले पदार्थों की जब्ती दर्ज की गई, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि राज्य में नशे की तस्करी का नेटवर्क कितना व्यापक है, साथ ही यह भी कि सुरक्षा एजेंसियां इस पर लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, पंजाब की भौगोलिक स्थिति इस समस्या का एक बड़ा कारण है। राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान से लगती है, जिससे ड्रग्स की तस्करी के लिए यह एक संवेदनशील क्षेत्र बन जाता है। हाल के वर्षों में ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों में भी तेजी आई है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती और बढ़ गई है।

पंजाब पुलिस और अन्य एजेंसियों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों के चलते बड़ी मात्रा में हेरोइन, अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स की बरामदगी हो रही है। हाल ही में कई बड़े ऑपरेशन में अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का भी पर्दाफाश हुआ है, जिनमें सीमा पार से जुड़े गिरोहों की भूमिका सामने आई है।

हालांकि, इस बढ़ती जब्ती को लेकर दो तरह की व्याख्या सामने आ रही है। एक ओर सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इसे अपनी सख्ती और सफलता का परिणाम बता रही हैं, वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स की बरामदगी इस बात का संकेत भी है कि राज्य में नशे का कारोबार अभी भी बड़े स्तर पर सक्रिय है।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब न केवल जब्ती के मामलों में आगे है, बल्कि हेरोइन जैसी खतरनाक ड्रग्स की बरामदगी में भी शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है।

इसके अलावा, ड्रग तस्करी के मामलों में दर्ज एफआईआर और गिरफ्तारियों की संख्या भी काफी अधिक है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य में नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस द्वारा सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी और तकनीकी उपकरणों के उपयोग से कई बड़े नेटवर्क को तोड़ा गया है।

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि नशे के कारोबार से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय गिरोह पंजाब के जरिए भारत में ड्रग्स पहुंचाने की कोशिश करते हैं। इससे न केवल कानून व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होती है, बल्कि युवाओं के भविष्य पर भी गंभीर असर पड़ता है।

राज्य सरकार ने भी इस समस्या से निपटने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। ‘नशा मुक्त पंजाब’ जैसे अभियानों के तहत जागरूकता फैलाने के साथ-साथ तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा, पुनर्वास केंद्रों की संख्या बढ़ाने और नशा पीड़ितों के इलाज पर भी जोर दिया जा रहा है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्तर पर भी व्यापक प्रयासों की जरूरत है। खासकर युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए रोजगार और शिक्षा के अवसर बढ़ाना जरूरी है।

फिलहाल, पंजाब का ड्रग जब्ती में दूसरे स्थान पर होना एक गंभीर संकेत है, जो यह दर्शाता है कि राज्य में नशे के खिलाफ लड़ाई अभी लंबी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और एजेंसियां इस चुनौती से कैसे निपटती हैं और क्या इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

सारांश

ड्रग जब्ती में पंजाब देश में दूसरे स्थान पर, राजस्थान पहले नंबर पर है। बड़ी मात्रा में बरामदगी नशे के बढ़ते नेटवर्क और एजेंसियों की सख्त कार्रवाई दोनों को दर्शाती है।

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