19 जून 2026 : एक राज्यसभा सांसद ने योग को भारत का दुनिया के लिए कालजयी और अमूल्य उपहार बताते हुए कहा कि यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और स्वस्थ बनाने की एक संपूर्ण जीवनशैली है। उन्होंने कहा कि योग ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
सांसद ने कहा कि आज दुनिया के करोड़ों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना चुके हैं। तनाव, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और बदलती जीवनशैली के बीच योग लोगों को शारीरिक एवं मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन परंपरा से निकला योग आज वैश्विक आंदोलन का रूप ले चुका है। योग के माध्यम से स्वास्थ्य, अनुशासन और आत्मचिंतन का संदेश दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचा है। यही कारण है कि हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दुनिया भर में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
सांसद के अनुसार, योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मन को भी शांति प्रदान करता है। नियमित योगाभ्यास से तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार आता है।
उन्होंने युवाओं से भी योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की। उनका कहना था कि आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने में योग एक प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि योग भारत की उन सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है, जिसने सीमाओं से परे जाकर वैश्विक पहचान बनाई है। स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में इसकी बढ़ती लोकप्रियता भारत की सॉफ्ट पावर को भी मजबूत करती है।
सांसद ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक योग की परंपरा को पहुंचाना और इसके लाभों के प्रति लोगों को जागरूक करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने इसे भारत की ऐसी धरोहर बताया, जो समय के साथ और अधिक प्रासंगिक होती जा रही है।
