चंडीगढ़ 09 अगस्त 2026 : कनाडा के अंतरराष्ट्रीय छात्र और अस्थायी वर्क परमिट कार्यक्रम को लेकर एक खुफिया रिपोर्ट ने वहां की आव्रजन व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ग्लोबल न्यूज के अनुसार, कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (सीबीएसए) की एक वर्गीकृत खुफिया रिपोर्ट में ऐसे भारतीय नागरिकों का उल्लेख किया गया है, जो अध्ययन या वर्क परमिट के माध्यम से कनाडा पहुंचे और बाद में संगठित अपराध से जुड़ी गतिविधियों में शामिल पाए गए।
रिपोर्ट में गैंग्स्टर गोल्डी बराड़ का मामला प्रमुख उदाहरण के तौर पर सामने आया है। गोल्डी बराड़ वर्ष 2017 में थॉम्पसन रिवर्स यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए कनाडा पहुंचा था। हालांकि उपलब्ध रिकॉर्ड से यह स्पष्ट नहीं है कि उसने वास्तव में कक्षाओं में पढ़ाई की थी या नहीं। बाद में उस पर कनाडा में बिश्नोई गिरोह का नेटवर्क फैलाने समेत संगठित अपराध से जुड़े गंभीर आरोप लगे।
2019 से 2023 तक करीब चार हजार भारतीयों पर आरोप
सीबीएसए की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2023 के बीच स्टडी परमिट पर कनाडा पहुंचे करीब 4,000 भारतीय नागरिकों पर कुल 17,929 आपराधिक मामलों में आरोप लगाए गए।
वहीं वर्ष 2024 में 2,418 भारतीय स्टडी परमिट धारकों पर 13,040 से अधिक आपराधिक आरोप लगाए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है। हालांकि, इन आंकड़ों को पूरे भारतीय छात्र समुदाय के संदर्भ में देखना जरूरी है।
वर्ष 2024 में कनाडा में मौजूद करीब 1,88,125 भारतीय छात्रों की तुलना में 2,418 आरोपित छात्र एक प्रतिशत से कुछ अधिक ही थे। इसलिए कुछ लोगों की आपराधिक गतिविधियों के आधार पर सभी भारतीय या पंजाबी छात्रों को संदेह की नजर से देखना उचित नहीं होगा।
आव्रजन व्यवस्था की निगरानी पर सवाल
रिपोर्ट से मुख्य सवाल कनाडा की आव्रजन जांच और निगरानी व्यवस्था पर उठता है। यदि संगठित अपराध से जुड़े गिरोह वैध आव्रजन माध्यमों, जैसे स्टडी परमिट और वर्क परमिट, का इस्तेमाल कनाडा में नेटवर्क बनाने, युवाओं को अपने साथ जोड़ने या जबरन वसूली और हिंसा जैसी गतिविधियों के लिए करते हैं, तो यह कनाडा की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है।
रिपोर्ट में संगठित अपराध और विदेशी सरकारों से जुड़े तत्वों के बीच संभावित संबंधों के आरोपों का भी उल्लेख होने की बात कही गई है। कनाडा की सरकार पहले भी भारत से जुड़े विदेशी हस्तक्षेप के आरोप लगा चुकी है, जबकि भारत इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
ऐसे में मामला केवल अंतरराष्ट्रीय छात्रों तक सीमित नहीं रह जाता। यह कनाडा की आव्रजन व्यवस्था की विश्वसनीयता, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेशी हस्तक्षेप और सार्वजनिक सुरक्षा से भी जुड़ गया है।
जरूरत इस बात की है कि आपराधिक गतिविधियों में शामिल तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, लेकिन ईमानदारी से पढ़ाई करने वाले लाखों अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपराध से जोड़कर नहीं देखा जाए।
