पटना 01 नवंबर 2026 : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर बिहार विधान परिषद सदस्य (MLC) निर्वाचित होने के एक हफ्ते से भी कम समय बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की घोषणा करने वाले बंसीधर ब्रजवासी और राहुल राज को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शनिवार देर रात एक बयान जारी कर यह मांग की। इससे कुछ घंटे पहले ही ब्रजवासी और राज ने भाजपा कार्यालय के बाहर पार्टी में शामिल होने की घोषणा की थी, जहां उन्होंने सदस्यता की पर्चियां लिए हुए तस्वीरें भी खिंचवाईं।
राजद नेता ने कहा कि दोनों नवनिर्वाचित विधान परिषद के सदस्यों को दल-बदल विरोधी कानून का ‘उल्लंघन’ करने के लिए अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने भाजपा पर ‘संविधान का मजाक बनाने’ का आरोप भी लगाया। यादव ने कहा, ‘विधान परिषद के दोनों नवनिर्वाचित सदस्यों ने औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुने जाने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होने का उनका यह कदम, भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता के प्रावधानों के दायरे में आता है।’
पूर्व उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) में स्पष्ट प्रावधान है कि निर्दलीय निर्वाचित कोई भी सदस्य चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो उसे सदन की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘संविधान के अनुच्छेद 191(2) के अनुसार दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य ठहराया गया सदस्य राज्य विधानमंडल का सदस्य बने रहने के योग्य नहीं रहता। दसवीं अनुसूची का पैरा 6(1) दल-बदल के आधार पर अयोग्यता से जुड़े सवालों पर फैसला लेने का अधिकार विधान परिषद के सभापति को देता है।’
यादव ने कहा कि निर्दलीय निर्वाचित होने के बाद दोनों सदस्यों का भाजपा में शामिल होना स्पष्ट रूप से ‘दल-बदल के आधार पर अयोग्यता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के दायरे में आता है।’ राजद नेता ने आरोप लगाया, ‘कुछ साल पहले विपक्ष के कई विधायक पाला बदलकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल हो गए थे लेकिन संबंधित दलों की ओर से लिखित शिकायतें दिए जाने के बावजूद भाजपा अध्यक्ष ने उनकी सदस्यता रद्द नहीं की। हालिया उदाहरण साहिबगंज के विधायक राजू सिंह (भाजपा) का है जो दिल्ली की एक अदालत द्वारा काफी पहले दोषी ठहराए जाने के बावजूद अब भी विधानसभा के सदस्य बने हुए हैं।’
