25 जून 2026 : Takht Sri Hazur Sahib ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा 1956 के हजूर साहिब अधिनियम को निरस्त करने के प्रस्तावित कदम के विरोध में एक ‘गुरमाता’ जारी किया है। इस निर्णय को सिख समुदाय के धार्मिक और प्रबंधन संबंधी अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।
धार्मिक सभा के दौरान पारित गुरमाता में कहा गया कि हजूर साहिब से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार का बदलाव सिख परंपराओं, धार्मिक मर्यादाओं और समुदाय की भावनाओं को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए। इसमें संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
सिख संगठनों और धार्मिक नेताओं का मानना है कि 1956 का अधिनियम तख्त साहिब के प्रबंधन और धार्मिक व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा है। इसलिए इसमें किसी भी परिवर्तन से पहले समुदाय की सहमति और सुझाव लेना आवश्यक है।
गुरमाता में कथित रूप से महाराष्ट्र सरकार से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की अपील की गई है। साथ ही सिख संगतों से धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता और परंपराओं की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया गया।
इस मुद्दे को लेकर विभिन्न सिख संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और समुदाय के प्रतिनिधियों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कई पक्ष इसे सिख धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन से जुड़ा संवेदनशील विषय मान रहे हैं।
फिलहाल इस मामले पर चर्चा और विचार-विमर्श जारी है। आने वाले समय में सरकार, धार्मिक संस्थाओं और समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच संवाद के माध्यम से आगे की दिशा तय होने की संभावना है।
