26 अक्तूबर 2026: सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आरोपी आशीष मिश्रा को दिवाली के अवसर पर अपने गृह नगर लखीमपुर खीरी जाकर परिवार और करीबी रिश्तेदारों के साथ त्योहार मनाने की अनुमति दे दी है। सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने यह राहत पहले से लागू शर्तों के अधीन दी। आशीष मिश्रा पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे हैं।
16 नवंबर तक लौटने का निर्देश
आशीष मिश्रा की ओर से पेश वकील ने अदालत से दिवाली पर परिवार के साथ समय बिताने के लिए गृह नगर जाने की अनुमति मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अनुरोध स्वीकार करते हुए उन्हें लखीमपुर खीरी जाने की इजाजत दी। उन्हें 16 नवंबर तक वापस लौटने का निर्देश दिया गया है।
यह अनुमति पहले से लागू जमानत संबंधी शर्तों के अधीन है। आशीष मिश्रा जमानत पर बाहर हैं, लेकिन मुकदमे की सुनवाई लंबित रहने के दौरान उनके लखीमपुर खीरी जाने पर प्रतिबंध लगाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई पर भी दिया जोर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई समय पर पूरी करने की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि मुकदमे में न तो अनावश्यक जल्दबाजी होनी चाहिए और न ही लंबे समय तक देरी होनी चाहिए। अभियोजन पक्ष को दोनों बातों के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
अदालत को बताया गया कि मामले में कुल 131 गवाह हैं, जिनमें से 90 की गवाही दर्ज की जा चुकी है। शेष गवाहों की गवाही और आगे की कानूनी प्रक्रिया के साथ मुकदमे की सुनवाई जारी है।
2021 की हिंसा से जुड़ा है मामला
यह मामला 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में हुई हिंसा से संबंधित है। उस समय किसान तत्कालीन कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। घटना में चार किसानों और एक पत्रकार समेत कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। हिंसा के दौरान वाहन से कुचले जाने और उसके बाद हुई घटनाओं को लेकर आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।
आशीष मिश्रा इस मामले में आरोपी हैं। दिसंबर 2023 में ट्रायल कोर्ट ने उनके और अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या तथा आपराधिक साजिश समेत विभिन्न आरोप तय किए थे। मामले में सुनवाई अभी जारी है। आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
अदालत की निगरानी में जारी रहेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने पहले आशीष मिश्रा को जमानत देते समय उनकी आवाजाही पर शर्तें लगाई थीं। बाद में कुछ विशेष अवसरों पर इन शर्तों में सीमित छूट दी गई। ताजा आदेश भी पहले से लागू शर्तों के अधीन है।
इस मामले में अदालत ने मुकदमे की प्रगति और सुनवाई में हो रही देरी पर ध्यान बनाए रखा है। दिवाली पर घर जाने की अनुमति से मुकदमे की स्थिति या आरोपों के गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।
