19 मई 2026 : पंजाब में कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए “बैगलेस डे” की नई पहल शुरू की जा रही है। इसके तहत छात्रों को शैक्षणिक सत्र के दौरान 10 दिन बिना स्कूल बैग के स्कूल आने का अवसर मिलेगा। इस कदम का उद्देश्य बच्चों को व्यावहारिक शिक्षा, रचनात्मक गतिविधियों और अनुभव आधारित सीखने से जोड़ना बताया जा रहा है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, इन बैगलेस दिनों में छात्रों को पारंपरिक किताब-कॉपी आधारित पढ़ाई के बजाय कौशल विकास, कला, खेल, हस्तकला, स्थानीय व्यवसायों की जानकारी और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में शामिल किया जाएगा।
पंजाब शिक्षा विभाग का कहना है कि इस पहल का मकसद छात्रों पर पढ़ाई के बोझ को कम करना और उन्हें व्यावहारिक जीवन से जुड़े अनुभव प्रदान करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार अकादमिक दबाव के बीच इस तरह की पहल बच्चों के मानसिक विकास, आत्मविश्वास और सामाजिक समझ को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
नई शिक्षा नीति के तहत भी अनुभव आधारित शिक्षा, कौशल विकास और गतिविधि आधारित सीखने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी दिशा में कई राज्यों में बैगलेस डे जैसी पहलें शुरू की जा रही हैं।
पंजाब के स्कूलों में इन दिनों के दौरान छात्रों को स्थानीय उद्योग, कृषि, हस्तशिल्प, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी भी दी जा सकती है।
शिक्षकों का कहना है कि इस पहल से बच्चों में रचनात्मकता बढ़ेगी और वे केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रहने के बजाय व्यवहारिक ज्ञान भी हासिल कर सकेंगे।
अभिभावकों की ओर से भी इस पहल को सकारात्मक कदम माना जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि इससे बच्चों पर भारी स्कूल बैग का बोझ कम होगा और वे पढ़ाई को अधिक आनंददायक तरीके से अनुभव कर पाएंगे।
पंजाब शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है, ताकि सभी संस्थान निर्धारित गतिविधियों को प्रभावी तरीके से लागू कर सकें।
विशेषज्ञों के अनुसार, शिक्षा प्रणाली में रचनात्मक और व्यावहारिक गतिविधियों को शामिल करना आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुका है।
फिलहाल, स्कूल प्रशासन इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारियों में जुटा हुआ है और आने वाले शैक्षणिक सत्र में इसे प्रभावी रूप से लागू किए जाने की उम्मीद है।
यह पहल यह दर्शाती है कि शिक्षा व्यवस्था में अब केवल परीक्षा आधारित पढ़ाई के बजाय समग्र विकास और अनुभव आधारित सीखने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
