8 अक्टूबर 2026: हरियाणा के करनाल जिले की अनाज मंडियों में धान की सरकारी खरीद की रफ्तार धीमी होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। राज्य सरकार ने 29 सितंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू की थी, लेकिन एक सप्ताह से ज्यादा समय बीतने के बाद भी कई मंडियों में खरीद अपेक्षित गति से नहीं हो पा रही है। किसान अपनी फसल लेकर कई दिनों से मंडियों में इंतजार कर रहे हैं और कुछ किसानों का आरोप है कि उन्हें मजबूरी में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत पर धान बेचना पड़ रहा है।
मंडियों में कई दिनों से इंतजार कर रहे किसान
करनाल जिले की विभिन्न अनाज मंडियों में किसान धान की फसल लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन खरीद एजेंसियों और राइस मिलर्स की सीमित मौजूदगी के कारण प्रक्रिया धीमी बनी हुई है। किसानों के अनुसार, उन्हें अपनी फसल लेकर चार से सात दिन तक मंडियों में इंतजार करना पड़ रहा है।
बुधनपुर आबाद के किसान बाबू ने बताया कि वह चार एकड़ से अधिक जमीन की धान की फसल लेकर मंडी पहुंचे हैं और चार-पांच दिन से खरीद का इंतजार कर रहे हैं। उनके अनुसार, फसल में नमी निर्धारित 17 प्रतिशत की सीमा से कम होने के बावजूद खरीद के लिए कोई मिलर या अधिकारी आगे नहीं आया।
MSP से कम दाम पर बिक्री का आरोप
किसानों का कहना है कि मंडियों में सरकारी खरीद की रफ्तार धीमी होने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। भारतीय किसान यूनियन (सिर छोटूराम) के प्रवक्ता बहादुर सिंह मेहला ने आरोप लगाया कि कुछ किसान MSP से करीब ₹300 से ₹400 प्रति क्विंटल कम कीमत पर धान बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि 14 से 17 प्रतिशत नमी वाली फसल भी कई जगह खरीदारों का इंतजार कर रही है। हालांकि, ये कीमतों और बिक्री से जुड़े आरोप किसान संगठनों की ओर से लगाए गए हैं।
राइस मिलर्स ने बताई देरी की वजह
राइस मिलर्स की ओर से खरीद प्रक्रिया में देरी के पीछे कागजी कार्रवाई और नई औपचारिकताओं को जिम्मेदार बताया गया है। मिलर्स का कहना है कि राइस मिलों की जियो-फेंसिंग और खरीद एजेंसियों के साथ मिलों को लिंक करने की प्रक्रिया में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।
उनके अनुसार, दस्तावेजों और सत्यापन की कई प्रक्रियाओं के कारण सरकारी खरीद व्यवस्था से जुड़ने में देरी हो रही है। इससे मंडियों में पहुंच रही धान की फसल की खरीद और उठान की रफ्तार प्रभावित हो रही है।
नमी की जांच को लेकर भी किसानों की शिकायत
करनाल के जुण्डला और निसिंग की मंडियों का दौरा करने पहुंचे उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने किसानों की शिकायतें सुनीं। जुण्डला मंडी में किसानों ने नमी जांचने वाली मशीनों की रीडिंग में अंतर को लेकर भी सवाल उठाए।
किसानों ने अधिकारियों के सामने खरीद प्रक्रिया में आ रही परेशानियों और मंडियों में फसल के लंबे समय तक पड़े रहने की समस्या रखी। उपायुक्त ने अधिकारियों को किसानों की समस्याओं का समाधान करने और खरीद प्रक्रिया को सुचारु बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वह स्वयं खरीद व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं।
सरकार ने 29 सितंबर से शुरू की थी खरीद
हरियाणा में धान की सरकारी खरीद इस सीजन में 29 सितंबर से शुरू की गई थी। इससे पहले राज्य सरकार ने खरीद की शुरुआत की तारीख 1 अक्टूबर से बदलकर 29 सितंबर कर दी थी। शुरुआती दिनों में कई मंडियों में अधिक नमी वाली फसल खरीद की रफ्तार में बड़ी बाधा बनी थी।
वहीं, राज्य स्तर पर भी खरीद और उठान की धीमी गति को लेकर किसानों में नाराजगी देखने को मिली है। हाल के दिनों में करनाल और आसपास के इलाकों में किसानों ने खरीद में तेजी लाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किए हैं।
किसानों पर बढ़ता आर्थिक दबाव
धान की फसल कटने के बाद किसानों के लिए उसे लंबे समय तक मंडी में खुले में रखना आसान नहीं होता। मंडी में इंतजार बढ़ने से किसान अगली फसल की तैयारी, परिवहन और भंडारण जैसी समस्याओं से भी जूझते हैं।
ऐसे में सरकारी खरीद में देरी होने पर निजी खरीदारों के पास कम कीमत पर फसल बेचने का दबाव बढ़ सकता है। इससे किसानों को MSP और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच अंतर के कारण सीधा आर्थिक नुकसान हो सकता है।
प्रशासन ने जल्द समाधान का भरोसा दिया
करनाल के उपायुक्त ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि उनकी शिकायतों का समाधान किया जाएगा और राइस मिलर्स के मंडियों में नहीं पहुंचने से जुड़ी समस्या को जल्द सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से खरीद प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ाने की बात भी कही गई है।
कुल मिलाकर, करनाल में धान की सरकारी खरीद धीमी होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। कई किसान चार से सात दिन तक मंडियों में इंतजार कर रहे हैं, जबकि किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि कुछ किसानों को MSP से कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ रही है। प्रशासन ने खरीद प्रक्रिया को तेज करने और किसानों की समस्याओं का समाधान करने का भरोसा दिया है।
