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सैन्य रिकॉर्ड और सामुदायिक स्मृति के बीच पुल: इटली में सिख प्रवासी कैसे जिंदा रख रहे हैं विश्व युद्ध के नायकों की याद

21 अगस्त 2026 :  विश्व युद्धों में सिख सैनिकों के योगदान का उल्लेख लंबे समय से ब्रिटिश और कॉमनवेल्थ सैन्य रिकॉर्ड में मिलता रहा है, लेकिन इटली में सिख प्रवासी समुदाय का एक समूह इन सैनिकों की अलग पहचान, बलिदान और विरासत को संरक्षित करने के लिए लगातार काम कर रहा है।

इटली स्थित स्वयंसेवी संगठन World Sikh Shaheed Military Memorial Committee (WSSMMC) वर्ष 2016 से उन सिख सैनिकों की पहचान और स्मृति को संरक्षित करने में जुटा है, जिन्होंने विश्व युद्धों के दौरान इटली के मोर्चों पर लड़ते हुए अपने प्राण गंवाए। संगठन ने इतालवी सरकार के सहयोग से अब तक 2,000 से अधिक सिख शहीद सैनिकों की पहचान और स्मृति को दर्ज किया है।

फोर्ली में बनाया गया सिख सैनिकों का स्मारक

हाल ही में संगठन ने इटली के फोर्ली, बोलोन्या के पास, एक स्मारक दीवार स्थापित की। इस पर खंडा चिन्ह के साथ उन सिख सैनिकों के नाम और तस्वीरें अंकित हैं, जिन्होंने इटली की धरती पर अपनी जान गंवाई थी।

इस अवसर पर करीब 20 इतालवी कम्यून के मेयरों को स्मरण कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया। सिख समुदाय के सदस्यों ने शहीद सैनिकों की याद में अरदास और अखंड पाठ भी किया।

2016 से चल रहा है अभियान

WSSMMC के सदस्य मनजिंदर सिंह के अनुसार, संगठन 2016 से उन स्थानों की तलाश, पहचान और दस्तावेजीकरण कर रहा है जहां विश्व युद्धों के दौरान सिख सैनिक शहीद हुए थे।

उन्होंने बताया कि संगठन का उद्देश्य केवल सैनिकों के नाम दर्ज करना नहीं, बल्कि उन स्थानों को भी चिह्नित करना है जहां इन सैनिकों ने युद्ध के दौरान अपना जीवन बलिदान किया।

संगठन की शुरुआत कैसे हुई?

इस पहल की जड़ें 2000 के दशक की शुरुआत में मिलती हैं। उस समय इटली में रहने वाले सिख समुदाय के सात सदस्यों, सिख इतिहासकार भूपिंदर सिंह हॉलैंड और इतालवी इतिहासकार डॉ. रोमन रॉसी ने मिलकर विश्व युद्धों में शहीद हुए सिख सैनिकों को खोजने और उनके लिए स्मारक स्थापित करने का अभियान शुरू किया था।

इसके बाद स्वयंसेवकों ने इटली के उन स्थानों पर स्मरण समारोह और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए, जो सिख सैनिकों की शहादत से सीधे जुड़े हुए थे।

निजी खर्च से बना रहे हैं स्मारक

संगठन के कई सदस्य कारोबारी हैं और अपनी जेब से स्मारकों और स्मृति कार्यक्रमों पर खर्च करते हैं। मनजिंदर सिंह पिछले 25 वर्षों से इटली में रह रहे हैं और मंटुआ में बिस्कुट निर्माण का व्यवसाय चलाते हैं।

उनके अनुसार, इस अभियान की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि आधिकारिक सैन्य रिकॉर्ड में सैनिकों की पूरी सामुदायिक और ऐतिहासिक कहानी हमेशा दर्ज नहीं होती।

सैन्य रिकॉर्ड और सिख सामुदायिक स्मृति के बीच पुल

मनजिंदर सिंह ने कहा कि प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में सिख सैनिकों से जुड़े कॉमनवेल्थ सैन्य रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनमें सिख रेजिमेंटों की भूमिका, समुदाय की स्मृति और आज सिख समाज द्वारा इन सैनिकों को याद किए जाने का व्यापक संदर्भ हमेशा सामने नहीं आता।

इसी अंतर को भरने के लिए संगठन आधिकारिक सैन्य रिकॉर्ड और सिख सामुदायिक स्मृति के बीच एक पुल बनाने की कोशिश कर रहा है।

पंजाब से भी जुड़ी है शहीदों की विरासत

इटली में सिख प्रवासी समुदाय का यह प्रयास पंजाब की ऐतिहासिक विरासत से भी गहराई से जुड़ा है। पंजाब के गांवों और परिवारों से बड़ी संख्या में सैनिक विश्व युद्धों में शामिल हुए थे। आज भी कई स्थानों पर इन सैनिकों की याद में स्मारक और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

इटली में चल रहा यह अभियान उन सैनिकों की कहानी को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की कोशिश है, जिनका बलिदान भारत और यूरोप के साझा इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कुल मिलाकर, इटली का सिख प्रवासी समुदाय विश्व युद्धों में शहीद हुए सिख सैनिकों की पहचान, उनके युद्धस्थलों और उनकी कहानियों को संरक्षित कर रहा है। स्मारकों, दस्तावेजीकरण और धार्मिक समारोहों के जरिए यह प्रयास सैन्य इतिहास को सामुदायिक स्मृति से जोड़ने का काम कर रहा है।

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