21 अगस्त 2026 : श्रावस्ती में मई 2025 में हुए एक कथित हाफ एनकाउंटर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने पुलिस की एनकाउंटर की कहानी में कई विसंगतियों पर सवाल उठाते हुए जांच तीन महीने में पूरी करने को कहा है।
13 पुलिसकर्मियों के एक जीप में पहुंचने पर सवाल
पुलिस की FIR के मुताबिक आरोपी को पकड़ने गई टीम में 1 इंस्पेक्टर, 5 सब-इंस्पेक्टर, 1 हेड कांस्टेबल और 6 कांस्टेबल, यानी कुल 13 पुलिसकर्मी शामिल थे।
हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि सामान्य पुलिस जीप या SUV में 13 लोगों के बैठने की क्षमता कैसे हो सकती है। अदालत ने CBI से यह जांच करने को कहा है कि पुलिस टीम वास्तव में किस वाहन से घटनास्थल तक पहुंची थी।
23 पुलिसकर्मियों के बीच आरोपी ने की फायरिंग, फिर भी कोई घायल नहीं
पुलिस के अनुसार घटनास्थल पर कुल 23 पुलिसकर्मियों ने आरोपी को घेर रखा था और आरोपी ने पुलिस पर सीधे फायरिंग की।
कोर्ट ने इस दावे पर भी सवाल उठाया कि इतने पुलिसकर्मियों के बीच आरोपी की गोली से एक भी पुलिसकर्मी घायल क्यों नहीं हुआ। अदालत ने इसे जांच का महत्वपूर्ण पहलू माना है।
अंधेरे में दोनों पैरों पर गोली लगने पर भी सवाल
पुलिस की कहानी के मुताबिक घटना रात करीब 11 बजे घने अंधेरे में हुई थी। SHO आरोपी से लगभग 15 मीटर की दूरी पर थे और कथित तौर पर उनकी गोली आरोपी के दोनों पैरों में लगी।
हाईकोर्ट ने इस निशानेबाजी पर सवाल उठाते हुए SHO की शूटिंग क्षमता और निशानेबाजी की दक्षता की भी जांच करने का निर्देश दिया है।
सिर्फ आवाज सुनकर सटीक निशाना लगाने का दावा
पुलिस के मुताबिक SHO ने अंधेरे में आरोपी के तमंचे को लोड करने की आवाज सुनी और उसी आधार पर गोली चलाई।
अदालत ने CBI से यह भी जांचने को कहा है कि ऐसी परिस्थितियों में सिर्फ आवाज के आधार पर इतना सटीक निशाना लगाना व्यावहारिक रूप से संभव था या नहीं।
तीन महीने में रिपोर्ट देगी CBI
हाईकोर्ट ने CBI को मामले की निष्पक्ष जांच कर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
अदालत के इन सवालों के बाद अब पूरे एनकाउंटर की परिस्थितियों, पुलिस टीम की मौजूदगी, गोली चलने की घटना और पुलिस के दावों की स्वतंत्र जांच होगी।
