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संगरूर जेल में नशा बरामदगी मामले पर हाईकोर्ट सख्त, रिकवरी के समय तैनात जेल सुपरिंटेंडेंट की मांगी जानकारी

15 सितंबर, 2026 संगरूर जिला जेल में नशीले पदार्थ, मोबाइल फोन और अन्य आपत्तिजनक सामग्री की बरामदगी से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने उस अधिकारी की पहचान और जानकारी मांगी है, जो संबंधित अवधि के दौरान जिला जेल संगरूर के सुपरिंटेंडेंट के पद पर तैनात था। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि जांच या विभागीय कार्रवाई के दौरान उस अधिकारी के खिलाफ कोई निष्कर्ष दर्ज किया गया था या नहीं।

हाईकोर्ट ने जेल सुपरिंटेंडेंट की मांगी जानकारी

जस्टिस संजय वशिष्ठ की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि कोर्ट को बताया जाए कि संबंधित समय में जिला जेल संगरूर का सुपरिंटेंडेंट कौन था। इसके साथ ही अदालत ने जांच या पूछताछ के दौरान उस अधिकारी के संबंध में सामने आए निष्कर्षों की जानकारी भी मांगी है।

कोर्ट ने इस संबंध में अगली सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की है।

जेल में तलाशी के दौरान हुई थी बरामदगी

यह मामला 27 अप्रैल 2025 को संगरूर के सिटी-1 पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से जुड़ा है। FIR संगरूर जिला जेल के हाई-सिक्योरिटी जोन में की गई तलाशी के बाद दर्ज की गई थी। तलाशी के दौरान अफीम, मोबाइल फोन और अन्य सामग्री बरामद होने की बात सामने आई थी।

अदालत को बताया गया कि शुरुआती तौर पर जेल के असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट मंदीप सिंह की ओर से 26 अप्रैल 2025 को जारी आधिकारिक पत्रों के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद जांच आगे बढ़ी।

SIT जांच में जेल अधिकारियों की भूमिका सामने आई

मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल यानी SIT की कार्रवाई का भी हाईकोर्ट ने उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, जांच में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस गुरप्रीत सिंह और ASI अशोक कुमार की कथित भूमिका सामने आई।

कोर्ट के आदेश में कहा गया कि दोनों पर जेल में बंद कैदियों के साथ साजिश कर नशीले पदार्थों और अन्य आपत्तिजनक सामग्री की आपूर्ति को सुविधाजनक बनाने तथा अपने आधिकारिक पद का कथित दुरुपयोग करने के आरोप सामने आए। इन आरोपों की जांच संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत की गई।

तीन आरोपियों को हाईकोर्ट से जमानत

यह मामला तीन आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने आया। अदालत ने आरोपियों की भूमिका, बरामदगी की प्रकृति और मात्रा, हिरासत में बिताए गए समय, मुकदमे की स्थिति और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखा।

हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि इसी तरह की स्थिति वाले कुछ सह-आरोपियों को पहले ही अदालत से जमानत मिल चुकी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने तीनों याचिकाकर्ताओं को नियमित जमानत देने का फैसला किया।

बिना बरामदगी के आरोपी की जिम्मेदारी पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल भी उठाया। अदालत ने पूछा कि अगर किसी आरोपी से सीधे कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ है, तो क्या उसे NDPS Act के तहत विशेष अदालत में मुकदमे का सामना करने के लिए उसी तरह जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में प्रत्येक आरोपी की भूमिका को स्वतंत्र रूप से देखा जाना जरूरी है। यानी केवल अन्य आरोपियों के साथ मामला जुड़े होने के आधार पर उसकी व्यक्तिगत भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

50 ग्राम अफीम की बरामदगी भी बनी आधार

अदालत के सामने यह पहलू भी आया कि एक आरोपी से 50 ग्राम अफीम बरामद होने का आरोप है। कोर्ट ने इसे गैर-वाणिज्यिक श्रेणी की बरामदगी के रूप में दर्ज किया और जमानत पर विचार करते समय बरामदगी की मात्रा को भी ध्यान में रखा।

हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत के मामले में आरोपों की प्रकृति, संबंधित आरोपी की भूमिका, बरामदगी की मात्रा, हिरासत की अवधि और मुकदमे की स्थिति जैसे सभी पहलुओं को समग्र रूप से देखा जाना चाहिए।

अब सुपरिंटेंडेंट की भूमिका पर भी जानकारी मांगी

इस मामले में हाईकोर्ट का ताजा निर्देश जेल प्रशासन की जवाबदेही से जुड़े पहलू पर केंद्रित है। अदालत यह जानना चाहती है कि जिस अवधि में जेल से नशीले पदार्थ और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई, उस समय जेल का प्रशासनिक प्रमुख कौन था और जांच के दौरान उसके संबंध में क्या निष्कर्ष सामने आए।

हालांकि, अदालत के इस निर्देश का मतलब यह नहीं है कि संबंधित सुपरिंटेंडेंट को किसी अपराध में दोषी ठहराया गया है। फिलहाल कोर्ट ने केवल संबंधित अधिकारी की पहचान और जांच में दर्ज निष्कर्षों की जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है।

14 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की है। उस समय अदालत के सामने संबंधित जेल सुपरिंटेंडेंट की पहचान और जांच में दर्ज निष्कर्षों की जानकारी रखी जाएगी।

मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही इस बात पर भी निर्भर करेगी कि जांच रिकॉर्ड में संबंधित अधिकारी की भूमिका को लेकर क्या तथ्य सामने आए हैं।

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