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उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव में तीन प्रत्याशी उतारेगी समाजवादी पार्टी, बढ़ा चुनावी मुकाबला

28 सितंबर 2026 उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी ने प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में उतारने का फैसला किया है। पार्टी के पास दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल है, लेकिन इसके बावजूद सपा ने तीसरे प्रत्याशी को भी चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति बनाई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी की ओर से प्रो. रामगोपाल यादव, पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन और सलीम इकबाल को प्रत्याशी बनाया जा रहा है। पार्टी के तीनों उम्मीदवार मंगलवार को नामांकन दाखिल करेंगे। इस फैसले के बाद राज्यसभा चुनाव में मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

10 राज्यसभा सीटों के लिए होगा चुनाव

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने वाला है। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक मतदान 16 अक्टूबर को होना है। इन 10 सीटों में वर्तमान में आठ सीटें भाजपा के पास हैं, जबकि एक-एक सीट समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के पास है।

इस चुनाव में सपा के लिए दो सीटों पर जीत की स्थिति संख्या बल के आधार पर मजबूत मानी जा रही है। तीसरे उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए पार्टी को अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। इसी वजह से तीसरी सीट का चुनावी गणित महत्वपूर्ण हो गया है।

रामगोपाल यादव को फिर मौका

समाजवादी पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता और मौजूदा राज्यसभा सदस्य प्रो. रामगोपाल यादव को दोबारा उच्च सदन भेजने पर सहमति बनाई है। रामगोपाल यादव लंबे समय से समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और पार्टी संगठन तथा संसदीय राजनीति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उनका नाम सपा की संभावित सूची में पहले से ही प्रमुखता से सामने आ रहा था। अब पार्टी की बैठक के बाद उन्हें दोबारा प्रत्याशी बनाए जाने का फैसला किया गया है।

आलोक रंजन की फिर वापसी की कोशिश

सपा ने पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन को भी एक बार फिर राज्यसभा चुनाव के मैदान में उतारने का फैसला किया है। आलोक रंजन वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार थे, लेकिन वह चुनाव नहीं जीत सके थे।

इस बार पार्टी ने उन्हें दोबारा प्रत्याशी बनाने का निर्णय लिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, सपा नेतृत्व ने उनसे चुनाव की तैयारी करने को कहा था।

तीसरे प्रत्याशी के रूप में सलीम इकबाल

तीसरे उम्मीदवार के तौर पर सलीम इकबाल का नाम सामने आया है। समाजवादी पार्टी तीसरे उम्मीदवार के जरिए अपने सामाजिक समीकरण को भी साधने की कोशिश कर रही है। इससे राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चयन के साथ-साथ विधायकों के समर्थन का गणित भी अहम हो गया है।

सपा के पास कितने विधायक?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं, जबकि उसकी सहयोगी कांग्रेस के दो विधायक हैं। इस तरह दोनों दलों के पास कुल 103 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए करीब 38 प्रथम वरीयता मतों की जरूरत होगी।

इस गणित के आधार पर सपा दो उम्मीदवारों को आसानी से जिताने की स्थिति में है। तीसरे उम्मीदवार के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। रिपोर्टों में बताया गया है कि तीसरी सीट के लिए सपा को अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।

2024 के चुनाव से लिया सबक

समाजवादी पार्टी के सामने वर्ष 2024 का राज्यसभा चुनाव भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ है। उस समय सपा ने तीन उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। पार्टी के पास तीनों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल था, लेकिन चुनाव के दौरान कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग के चलते पार्टी के तीसरे उम्मीदवार आलोक रंजन चुनाव हार गए थे।

उस चुनाव में भाजपा ने संजय सेठ को आठवें उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा था। क्रॉस वोटिंग के बाद भाजपा अपने अतिरिक्त उम्मीदवार को भी राज्यसभा भेजने में सफल रही थी।

इस बार सपा उसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए अपने विधायकों को एकजुट रखने और तीसरे उम्मीदवार के लिए जरूरी समर्थन जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है।

भाजपा के लिए भी आठवीं सीट का गणित

राज्यसभा चुनाव में केवल सपा ही तीसरी सीट को लेकर रणनीति नहीं बना रही है। भाजपा के सामने भी आठवीं सीट जीतने का गणित महत्वपूर्ण है। रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा के पास सात सीटों के लिए पर्याप्त संख्या बल है, जबकि आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी।

इस कारण सपा के तीसरे उम्मीदवार और भाजपा के आठवें उम्मीदवार के बीच मुकाबले के लिए विधायकों की संख्या और दूसरी वरीयता के वोट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले अहम चुनाव

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव भी होना है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव को विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि राज्यसभा चुनाव का परिणाम सीधे विधानसभा चुनाव का परिणाम निर्धारित नहीं करता, लेकिन दोनों प्रमुख दलों के लिए विधायकों की एकजुटता और गठबंधन के समीकरण महत्वपूर्ण रहेंगे।

समाजवादी पार्टी के तीसरे उम्मीदवार को लेकर पार्टी के सामाजिक समीकरण और अतिरिक्त समर्थन जुटाने की रणनीति पर भी नजर रहेगी।

नामांकन के बाद तस्वीर होगी साफ

सपा के तीनों उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने के बाद चुनावी तस्वीर और स्पष्ट होगी। इसके बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अन्य दल किस तरह उम्मीदवार मैदान में उतारते हैं और किसे समर्थन देते हैं।

फिलहाल समाजवादी पार्टी ने दो संभावित रूप से सुरक्षित सीटों से आगे बढ़कर तीसरे उम्मीदवार को भी मैदान में उतारने का फैसला किया है। इससे उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में संख्या बल, उम्मीदवारों के सामाजिक समीकरण और विधायकों के समर्थन का गणित महत्वपूर्ण हो गया है।

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