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RTI में खुलासा: करोड़ों रुपये की पर्यावरणीय राहत राशि वसूलने के बावजूद पारिस्थितिकी संरक्षण में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर उठे सवाल

18 जून 2026 : Punjab Pollution Control Board की कार्यप्रणाली को लेकर एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) के जरिए सामने आई जानकारी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बोर्ड ने वर्षों में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति और राहत के रूप में करोड़ों रुपये की राशि वसूल की, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकी सुधार के क्षेत्र में अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दिए।

आरटीआई से सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, विभिन्न उद्योगों और संस्थानों से पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर बड़ी रकम वसूली गई। हालांकि, यह सवाल उठाया जा रहा है कि इन निधियों का उपयोग पर्यावरण सुधार, प्रदूषण नियंत्रण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए किस हद तक प्रभावी ढंग से किया गया।

Punjab में वायु, जल और औद्योगिक प्रदूषण लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि वसूली गई राशि का प्रभावी उपयोग किया जाता, तो प्रदूषण नियंत्रण और पारिस्थितिकी संरक्षण के क्षेत्र में अधिक ठोस परिणाम देखने को मिल सकते थे।

आरटीआई के आधार पर उठे सवालों के बाद पर्यावरण विशेषज्ञों ने निधियों के उपयोग, परियोजनाओं की प्रगति और निगरानी तंत्र में अधिक पारदर्शिता की मांग की है। उनका मानना है कि पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई करना भी होना चाहिए।

वहीं, संबंधित अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड विभिन्न पर्यावरणीय परियोजनाओं और प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर लगातार काम कर रहा है। यदि किसी स्तर पर कमियां पाई जाती हैं, तो उनकी समीक्षा की जा सकती है।

यह मामला एक बार फिर इस बहस को सामने लाया है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए एकत्र की गई राशि का उपयोग कितनी प्रभावशीलता और पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जवाबदेही और नियमित ऑडिट से ऐसी निधियों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित किया जा सकता है।

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