29 जुलाई,2026 रोहतक: पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PGIMS), रोहतक में रक्तदान के दौरान की जाने वाली जांच के माध्यम से साइलेंट (लक्षणहीन) हेपेटाइटिस के मामलों की समय रहते पहचान की जा रही है। इस पहल से संक्रमित लोगों को शुरुआती चरण में उपचार का अवसर मिल रहा है और सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने में भी मदद मिल रही है।
अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोगों को हेपेटाइटिस बी या सी संक्रमण होने के बावजूद लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में रक्तदान से पहले की जाने वाली अनिवार्य स्क्रीनिंग कई मामलों का पता लगाने में प्रभावी साबित हो रही है।
रक्तदान से पहले होती है विस्तृत जांच
PGIMS में प्रत्येक रक्तदाता के रक्त की हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, एचआईवी और अन्य संक्रमणों के लिए जांच की जाती है। यदि किसी व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो उसे गोपनीय रूप से सूचित कर आगे की चिकित्सकीय सलाह और उपचार के लिए भेजा जाता है।
सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने में मदद
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया से न केवल संक्रमित व्यक्ति की समय पर पहचान होती है, बल्कि रक्त प्राप्त करने वाले मरीजों तक सुरक्षित रक्त पहुंचाना भी सुनिश्चित होता है। इससे संक्रमण फैलने का जोखिम काफी कम हो जाता है।
नियमित जांच और जागरूकता की अपील
डॉक्टरों ने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की है। उनका कहना है कि समय पर पहचान और इलाज से हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
