12 अक्टूबर 2026: पंजाबी साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लेखक जसवीर राणा और अमरजीत कौंके को सम्मानित किया गया। अमृतसर के विरसा विहार में रविवार को आयोजित एक वार्षिक साहित्यिक कार्यक्रम में दोनों साहित्यकारों को अलग-अलग पुरस्कार प्रदान किए गए। यह कार्यक्रम अखर साहित्य अकादमी और डॉ. कुलवंत यादगारी ट्रस्ट की ओर से आयोजित किया गया था।
जसवीर राणा को डॉ. कुलवंत यादगारी पुरस्कार
पंजाबी कथा साहित्य में योगदान के लिए जसवीर राणा को डॉ. कुलवंत यादगारी पुरस्कार दिया गया। राणा पंजाबी साहित्य में अपनी कहानियों और उपन्यास के लिए पहचाने जाते हैं। उनके नाम आधा दर्जन से अधिक कहानी संग्रह और एक उपन्यास दर्ज हैं।
उनकी प्रमुख रचनाओं में सिखर दुपहिरा, खित्तियां घूम रहियां ने, बिल्लियां अखां दा जादू और किन्नरां दा वी दिल हुंदा है शामिल हैं। साहित्य लेखन के साथ-साथ जसवीर राणा अमरगढ़ के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक के रूप में भी कार्यरत हैं।
अमरजीत कौंके को परमिंदरजीत यादगारी पुरस्कार
प्रसिद्ध पंजाबी कवि, अनुवादक और साहित्यिक संपादक अमरजीत कौंके को परमिंदरजीत यादगारी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनका जन्म 1964 में लुधियाना में हुआ था। उन्होंने पंजाबी और हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
कौंके के छह पंजाबी कविता संग्रह और चार हिंदी कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने बच्चों के साहित्य पर भी पांच पुस्तकें लिखी हैं। अनुवाद के क्षेत्र में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वह लगभग 40 पुस्तकों का हिंदी और पंजाबी में अनुवाद कर चुके हैं, जिससे दोनों भाषाओं के पाठकों को विभिन्न साहित्यकारों की रचनाएं पढ़ने का अवसर मिला है।
दोनों साहित्यकारों को मिला नकद पुरस्कार
समारोह में दोनों साहित्यकारों को स्मृति चिह्न, शॉल और 21,000 रुपये की नकद राशि देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान पंजाबी भाषा और साहित्य के प्रति उनके योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से प्रदान किया गया।
पुस्तक का भी हुआ विमोचन
कार्यक्रम के दौरान ब्रिटेन में रहने वाले पंजाबी लेखक और डॉक्टर डॉ. करनैल शेरगिल की पुस्तक ‘बदलदे परछावे’ का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों को नई रचनाओं से परिचित होने का अवसर मिला।
इस तरह कार्यक्रम में साहित्यकारों को सम्मानित करने के साथ-साथ नई पुस्तक को पाठकों के सामने लाने की पहल भी की गई।
पंजाबी साहित्य और अनुवाद को मिल रहा प्रोत्साहन
जसवीर राणा की कहानियां और उपन्यास पंजाबी कथा साहित्य में उनकी पहचान को दर्शाते हैं, जबकि अमरजीत कौंके की कविताओं और अनुवाद कार्य ने पंजाबी तथा हिंदी भाषाओं के बीच साहित्यिक संवाद को आगे बढ़ाया है।
ऐसे साहित्यिक आयोजन लेखकों के योगदान को पहचान देने और क्षेत्रीय भाषाओं की रचनात्मक परंपरा को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। अमृतसर में आयोजित इस कार्यक्रम में दोनों साहित्यकारों को सम्मानित करना पंजाबी साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर रहा।
