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पंजाब में PTM पर सियासत तेज, शिक्षकों ने कहा- पढ़ाई से ज्यादा सरकारी योजनाओं के प्रचार पर जोर

9 अक्टूबर 2026:  पंजाब के सरकारी स्कूलों में 9 अक्टूबर को आयोजित मेगा पैरेंट-टीचर मीटिंग (PTM) को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिए गए कि वे बैठक में विधायकों, पार्षदों और जिला परिषद से जुड़े जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी सुनिश्चित करें। इस निर्देश पर शिक्षक संगठनों ने सवाल उठाते हुए कहा है कि पैरेंट-टीचर मीटिंग का मुख्य उद्देश्य छात्रों की पढ़ाई और प्रदर्शन पर चर्चा करना होना चाहिए, न कि सरकारी योजनाओं का प्रचार करना।

स्कूलों में जनप्रतिनिधियों को बुलाने के निर्देश

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) की ओर से जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर 9 अक्टूबर की मेगा PTM में विधायकों, विधानसभा क्षेत्र के प्रभारियों और जिला परिषद के अधिकारियों को आमंत्रित करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद जिला शिक्षा कार्यालयों की ओर से भी स्कूल प्रमुखों को इसी तरह के निर्देश मिलने की बात सामने आई।

शिक्षा विभाग की इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाना बताया जा रहा है। हालांकि, शिक्षक संगठनों ने इस व्यवस्था के साथ जोड़ी गई अन्य गतिविधियों पर आपत्ति जताई है।

सरकारी योजनाओं का प्रचार कराने पर शिक्षकों की आपत्ति

डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट, अमृतसर के जिला प्रमुख अश्वनी अवस्थी ने आरोप लगाया कि शिक्षकों से बैठक के दौरान राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताने, लाभार्थियों के अनुभव रिकॉर्ड करने और अभिभावकों की प्रतिक्रिया लेने को कहा गया है।

शिक्षकों के मुताबिक, उन्हें ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ और तीर्थयात्रा बस योजना जैसी सरकारी पहलों का उल्लेख करने के साथ-साथ लाभार्थियों के बयान रिकॉर्ड करने और उन्हें स्कूलों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तथा व्हाट्सऐप समूहों पर साझा करने के लिए भी कहा गया है।

कुछ स्कूल प्रमुखों को आम आदमी पार्टी सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करने वाले प्रचार संबंधी पर्चे मिलने की बात भी सामने आई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से PTM का शैक्षणिक उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। citeturn803854news4

छात्रों की पढ़ाई और प्रदर्शन पर होनी चाहिए चर्चा

शिक्षकों का कहना है कि पैरेंट-टीचर मीटिंग का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई की स्थिति से अवगत कराना है। बैठक में छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन, स्कूल में उपस्थिति, उनकी खूबियों और उन विषयों पर चर्चा होनी चाहिए जिनमें उन्हें सुधार की जरूरत है।

उनके अनुसार, अभिभावकों के साथ बातचीत से यह समझने में मदद मिलती है कि बच्चा किन विषयों में अच्छा कर रहा है और कहां उसे अतिरिक्त सहयोग की जरूरत है। इसी आधार पर शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चे की पढ़ाई को बेहतर बनाने की योजना बना सकते हैं।

शिक्षकों को आशंका है कि अगर बैठक का बड़ा हिस्सा जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी, सरकारी योजनाओं के प्रचार और वीडियो रिकॉर्डिंग जैसी गतिविधियों में खर्च होगा, तो छात्रों की शैक्षणिक जरूरतों पर चर्चा के लिए समय कम रह सकता है।

गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों का भी मुद्दा

शिक्षक संगठनों ने यह भी कहा है कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को पहले से ही पढ़ाने के अलावा कई तरह की गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। इनमें सर्वेक्षण, चुनाव से संबंधित काम और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों से जुड़ी जिम्मेदारियां शामिल हैं।

शिक्षकों का मानना है कि लगातार अतिरिक्त कार्य मिलने से कक्षा में पढ़ाने के लिए उपलब्ध समय प्रभावित हो सकता है। ऐसे में नई गतिविधियों को जोड़ने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि छात्रों की पढ़ाई और शिक्षकों की मुख्य जिम्मेदारी पर इसका नकारात्मक असर न पड़े।

शिक्षा विभाग के निर्देश से बढ़ी बहस

9 अक्टूबर की मेगा PTM को लेकर जारी निर्देशों ने सरकारी स्कूलों में अभिभावकों की भागीदारी और शिक्षा व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर नई बहस शुरू कर दी है। एक ओर स्कूलों और समुदाय के बीच संपर्क बढ़ाने की बात है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि बैठक का केंद्र छात्रों की शिक्षा ही बनी रहे।

सरकारी स्कूलों में PTM अभिभावकों और शिक्षकों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। इसके जरिए बच्चों की उपस्थिति, पढ़ाई में प्रगति और उनकी जरूरतों को समझने का अवसर मिलता है। इसलिए शिक्षक संगठनों का जोर है कि ऐसी बैठकों में शैक्षणिक विषयों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

आगे क्या रहेगा अहम?

इस विवाद के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्कूलों में मेगा PTM के दौरान शैक्षणिक चर्चा और अन्य गतिविधियों के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है। शिक्षकों की आपत्तियां इस बात पर केंद्रित हैं कि बैठक का समय छात्रों की प्रगति और उनकी पढ़ाई से जुड़े मुद्दों के लिए पर्याप्त होना चाहिए।

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