• Wed. Oct 21st, 2026

अमित शाह के पंजाब दौरे से पहले बड़ा फैसला, झोटा हत्याकांड की जांच CBI को सौंपी

21 अक्तूबर 2026:  पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में राज्य सरकार ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को इसकी घोषणा की। यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे से कुछ घंटे पहले लिया गया। झोटा का परिवार लंबे समय से मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा था।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि सरकार झोटा के पिता और परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि परिवार की मांग को स्वीकार करते हुए मामले की जांच CBI को सौंपी जा रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए सरकार सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।

परिवार की मांग पर लिया गया फैसला

परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद से ही उनके परिजन और समर्थक निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। परिवार का कहना था कि मामले की जांच ऐसी एजेंसी से कराई जानी चाहिए, जिस पर उन्हें भरोसा हो। CBI जांच की मांग को लेकर मानसा में विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे थे।

झोटा के पिता भीम सिंह, जो पूर्व सैनिक हैं, ने मामले की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग उठाई थी। परिवार और न्याय की मांग कर रही संयुक्त कार्रवाई समिति ने भी इस मांग को प्रमुखता से उठाया था।

लगातार विरोध और परिवार की मांग के बीच पंजाब सरकार ने जांच CBI को सौंपने की घोषणा की। इसके बाद राज्य सरकार के अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर कार्रवाई समिति के सदस्यों से बातचीत की और CBI जांच से संबंधित सरकारी पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी शामिल थे।

13 अक्टूबर को हुई थी झोटा की हत्या

परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर 2026 को मानसा में एक मेडिकल स्टोर के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह नशे के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे। रिपोर्टों के अनुसार, घटना से पहले मेडिकल स्टोर के संचालक अश्वनी कुमार के साथ उनकी कहासुनी हुई थी। झोटा ने कथित तौर पर दुकान पर नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर सवाल उठाए थे।

घटना के दौरान झोटा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लाइव थे। इस वारदात में उनके चार साथी भी घायल हुए थे। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

पुलिस ने आरोपी अश्वनी कुमार को राजस्थान से गिरफ्तार किया था। हालांकि, परिवार और समर्थकों ने घटना के पीछे किसी व्यापक साजिश की आशंका जताते हुए गहन जांच की मांग की। इन आरोपों और आशंकाओं की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।

अंतिम संस्कार को लेकर भी बना रहा गतिरोध

झोटा की हत्या के बाद परिवार ने न्याय और CBI जांच की मांग पूरी होने तक उनके अंतिम संस्कार को लेकर सहमति नहीं दी थी। उनका शव मानसा के सिविल अस्पताल में रखा हुआ था। परिवार ने पोस्टमार्टम की अनुमति देने से भी इनकार किया था।

प्रदर्शनकारियों की मांग केवल जांच एजेंसी बदलने तक सीमित नहीं थी। परिवार और कार्रवाई समिति ने मामले में जवाबदेही तय करने तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करने की मांग उठाई थी।

इस घटनाक्रम ने पंजाब में नशे की समस्या और उससे जुड़े कथित अवैध कारोबार पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित किया। विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक समूहों ने भी मामले में न्याय की मांग की। 15 अक्टूबर को इस मुद्दे को लेकर राज्य में बंद भी आयोजित किया गया था। लचल तेज

CBI जांच की घोषणा ऐसे समय हुई, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पंजाब के दौरे पर आने वाले थे। उनके कार्यक्रम में मानसा में झोटा के परिवार से मुलाकात के अलावा संगरूर और गुरदासपुर जिलों में नशे से जुड़े मामलों में प्रभावित परिवारों से मिलना भी शामिल था।

इससे पहले केंद्र सरकार ने पंजाब में झोटा की हत्या और संगरूर से जुड़े एक अन्य मामले पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। झोटा हत्याकांड को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच नशे की समस्या तथा कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई थी।

अमित शाह ने अपने पंजाब दौरे के दौरान अन्य प्रभावित परिवारों से भी मुलाकात की। बाद में लुधियाना में दशहरा कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संगरूर और बटाला से जुड़े मामलों की जांच भी CBI को सौंपने की मांग उठाई। इस तरह झोटा हत्याकांड का मामला पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया।

अब CBI जांच पर टिकी निगाहें

पंजाब सरकार के फैसले के बाद अब मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। परिवार को उम्मीद है कि स्वतंत्र जांच से हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल हो सकेगी और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी।

हालांकि, CBI जांच सौंपने का फैसला अपने आप में मामले का अंतिम निष्कर्ष नहीं है। हत्या के कारणों, कथित साजिश और अन्य लोगों की संभावित भूमिका से जुड़े सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।

परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने पंजाब में नशे के खिलाफ काम करने वाले लोगों की सुरक्षा और अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार पर नियंत्रण जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब परिवार, समर्थकों और आम लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *