12 जुलाई 2026 : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सिर्फ धमकी मिलने का आरोप लगाने मात्र से किसी व्यक्ति को सरकारी सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय वास्तविक खतरे के आकलन और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि सुरक्षा मांगने वाले प्रत्येक मामले में संबंधित एजेंसियों को खतरे का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करना होगा। यदि जांच में वास्तविक और गंभीर खतरे की पुष्टि होती है, तभी कानून के अनुसार सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सकती है।
अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी सुरक्षा एक सीमित संसाधन है, इसलिए इसे केवल उन लोगों को दिया जाना चाहिए जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता हो। बिना पर्याप्त आधार के सुरक्षा प्रदान करना उचित नहीं होगा।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सुरक्षा से जुड़े मामलों में निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों का पालन करते हुए निष्पक्ष तरीके से निर्णय लें। प्रत्येक मामले में उपलब्ध तथ्यों, पुलिस रिपोर्ट और खतरे के स्तर का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
इस फैसले को सरकारी सुरक्षा से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी दिशा-निर्देश माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा प्रदान करने का उद्देश्य वास्तविक खतरे से लोगों की रक्षा करना है, न कि केवल आरोपों के आधार पर सुरक्षा उपलब्ध कराना।
