22 अक्तूबर 2026: पंजाब में पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए किसानों ने करीब 21 हजार मशीनें खरीदी हैं। इन मशीनों की मदद से धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाली पराली का उचित प्रबंधन करने और उसे जलाने की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है।
पराली जलाने की समस्या से निपटने पर जोर
धान की कटाई के बाद खेतों में बची पराली को जलाना पंजाब और आसपास के राज्यों में वायु प्रदूषण की प्रमुख चिंताओं में शामिल रहता है। पराली जलाने से निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में पराली प्रबंधन के लिए कृषि मशीनों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जाता है।
मशीनों से किसानों को कैसे मिलेगी मदद?
पराली प्रबंधन से जुड़ी मशीनें फसल अवशेषों को खेत में संभालने, मिट्टी में मिलाने या अन्य उपयोग के लिए तैयार करने में मदद करती हैं। इनके इस्तेमाल से किसानों को फसल अवशेषों के निपटारे के वैकल्पिक तरीके मिल सकते हैं और पराली जलाने पर निर्भरता घटाने में सहायता मिल सकती है।
पराली प्रबंधन क्यों है जरूरी?
पंजाब में धान की कटाई के मौसम में पराली का उचित निपटारा कृषि और पर्यावरण, दोनों के लिहाज से अहम है। मशीनों की उपलब्धता के साथ-साथ उनका समय पर इस्तेमाल, किसानों को तकनीकी सहायता और जागरूकता भी जरूरी है, ताकि फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।
