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पंजाब में ‘डबल डोमिसाइल’ पर बड़ा एक्शन, फरीदकोट मेडिकल यूनिवर्सिटी ने 25 उम्मीदवारों को किया डिबार

2 सितंबर 2026  फरीदकोट स्थित बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS) ने MBBS दाखिलों में कथित ‘डबल डोमिसाइल’ मामले को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। विश्वविद्यालय ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए पंजाब की 85 प्रतिशत राज्य कोटा सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया से 25 उम्मीदवारों को डिबार कर दिया है।

विश्वविद्यालय की जांच में सामने आया कि इन उम्मीदवारों ने पंजाब के राज्य कोटे के साथ-साथ दूसरे राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों की राज्य कोटा सीटों के लिए भी आवेदन किया था। नियमों के अनुसार एक उम्मीदवार एक से अधिक राज्यों के राज्य कोटा का लाभ नहीं ले सकता।

किन राज्यों में भी किया था आवेदन?

BFUHS की जांच में 25 उम्मीदवारों के आवेदन दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य कोटा से भी जुड़े पाए गए। इनमें सबसे अधिक आठ उम्मीदवारों ने चंडीगढ़ के राज्य कोटे के लिए भी आवेदन किया था।

इसके अलावा पांच उम्मीदवारों ने कर्नाटक, तीन ने हिमाचल प्रदेश और तीन ने मध्य प्रदेश के राज्य कोटे के लिए आवेदन किया था। एक-एक उम्मीदवार का आवेदन असम, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के राज्य कोटे से भी जुड़ा पाया गया।

विश्वविद्यालय ने रिकॉर्ड की जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के सत्यापन के बाद इन उम्मीदवारों को पंजाब राज्य कोटे की दाखिला प्रक्रिया से बाहर कर दिया।

85 प्रतिशत पंजाब राज्य कोटा सीटों पर लागू नियम

पंजाब में MBBS दाखिले के लिए 85 प्रतिशत सीटें राज्य कोटे के तहत आती हैं। इन सीटों के लिए उम्मीदवारों को पंजाब सरकार की ओर से निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होता है।

BFUHS ने उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पंजाब सरकार की 10 जुलाई 2026 की अधिसूचना के Clause 18 का हवाला दिया। विश्वविद्यालय के अनुसार जांच के दौरान पाए गए 25 उम्मीदवार इस प्रावधान का पालन नहीं कर रहे थे।

इसके चलते उन्हें शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पंजाब राज्य कोटे की MBBS सीटों के लिए विचार किए जाने से डिबार कर दिया गया।

क्या है ‘डबल डोमिसाइल’ का मामला?

‘डबल डोमिसाइल’ से आशय ऐसे मामले से है, जिसमें कोई उम्मीदवार एक से अधिक राज्यों के राज्य कोटे में दाखिले का दावा करता है। मेडिकल दाखिलों में राज्य कोटा सीटों का लाभ लेने के लिए उम्मीदवार को संबंधित राज्य की निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होता है।

BFUHS अधिकारियों के अनुसार कुछ उम्मीदवार अलग-अलग राज्यों में राज्य कोटा सीटों के लिए आवेदन करके एक से अधिक जगह लाभ लेने की कोशिश कर रहे थे। अधिकारियों ने कहा कि अलग-अलग राज्यों के बीच रिकॉर्ड की क्रॉस-वेरिफिकेशन में मौजूद अंतर का फायदा उठाकर इस तरह की गड़बड़ी की जा सकती है।

उम्मीदवारों और अभिभावकों से लिया जाता है हलफनामा

इस तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए पंजाब सरकार ने उम्मीदवारों और उनके अभिभावकों से हलफनामा लेने की व्यवस्था की है। इसमें यह घोषणा करनी होती है कि उम्मीदवार किसी दूसरे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में राज्य कोटा सीट का दावा नहीं कर रहा है।

अधिकारियों के अनुसार यह हलफनामा राज्य कोटा दाखिला प्रक्रिया में एक शुरुआती जांच के रूप में काम करता है। हालांकि, विश्वविद्यालय को मिली शिकायतों और रिकॉर्ड की जांच में कुछ उम्मीदवारों के बारे में ऐसी जानकारी सामने आई, जिसके बाद उनके दस्तावेजों और डोमिसाइल संबंधी दावों की जांच की गई।

शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच

BFUHS अधिकारियों के अनुसार कई अभिभावकों और उम्मीदवारों की ओर से शिकायतें मिली थीं कि कुछ अभ्यर्थी एक से अधिक राज्यों के राज्य कोटे का लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।

इन शिकायतों के आधार पर विश्वविद्यालय ने संदिग्ध उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए डोमिसाइल प्रमाणपत्रों और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू की। रिकॉर्ड की जांच के बाद 25 उम्मीदवारों को पंजाब के 85 प्रतिशत राज्य कोटा MBBS दाखिला प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।

यह कार्रवाई मेडिकल दाखिला प्रक्रिया में पात्रता नियमों को लेकर विश्वविद्यालय की सख्ती को दर्शाती है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

पंजाब में मेडिकल दाखिलों के दौरान डोमिसाइल को लेकर विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। अगस्त 2026 में BFUHS ने MBBS और BDS की पहली ऑनलाइन काउंसलिंग में 5,726 उम्मीदवारों में से 525 को पात्र नहीं माना था। इनमें कई उम्मीदवारों पर एक से अधिक राज्यों के राज्य कोटे का दावा करने का आरोप था।

उस कार्रवाई में पंजाब सरकार की 10 जुलाई 2026 की अधिसूचना के Clause 11 के तहत पात्रता की जांच की गई थी। अधिकारियों ने कहा था कि गलत डोमिसाइल दावे दाखिला प्रक्रिया की पारदर्शिता को प्रभावित कर सकते हैं।

मेडिकल दाखिलों में पारदर्शिता पर जोर

BFUHS की ताजा कार्रवाई से साफ है कि पंजाब में मेडिकल दाखिला प्रक्रिया के दौरान राज्य कोटा पात्रता की जांच को गंभीरता से लिया जा रहा है। विश्वविद्यालय ने रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर उम्मीदवारों की पात्रता की जांच की है।

राज्य कोटा सीटें मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में यदि कोई उम्मीदवार एक से अधिक राज्यों के कोटे में दावा करता है तो इससे पात्र उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित होने की आशंका रहती है।

इसी वजह से सरकार और विश्वविद्यालय स्तर पर डोमिसाइल दावों की जांच और क्रॉस-वेरिफिकेशन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

25 उम्मीदवारों को दाखिले से बाहर किया गया

BFUHS ने स्पष्ट किया कि जिन 25 उम्मीदवारों को डिबार किया गया है, उन्हें 2026-27 सत्र में पंजाब की 85 प्रतिशत राज्य कोटा MBBS सीटों के लिए दाखिले के लिए विचार नहीं किया जाएगा।

विश्वविद्यालय की कार्रवाई का मुख्य आधार यह पाया जाना रहा कि संबंधित उम्मीदवारों ने पंजाब के साथ अन्य राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य कोटा में भी आवेदन किया था।

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