• Thu. Oct 22nd, 2026

पंजाब विधानसभा के छह दिवसीय सत्र में AAP और विपक्ष आमने-सामने, इन मुद्दों पर मचेगा घमासान

22अक्तूबर 2026:  पंजाब विधानसभा का छह दिवसीय सत्र 22 अक्टूबर से शुरू हो रहा है। सत्र के दौरान सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और विपक्षी दलों के बीच कई अहम मुद्दों पर टकराव होने की संभावना है। विपक्ष नशा तस्करी, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं, सत्तारूढ़ दल अपनी नीतियों और नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का बचाव करते हुए किसानों तथा पंजाब के नदी जल अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठा सकता है।

इस सत्र में परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव और महिलाओं के लिए संभावित राहत जैसे मुद्दे भी चर्चा में रह सकते हैं। ऐसे में विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।

नशा तस्करी को लेकर सरकार से जवाब मांगेगा विपक्ष

पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय रही है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार नशा तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में सफल नहीं रही है। कांग्रेस सहित विपक्षी दल विधानसभा में इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग सकते हैं।

नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। विपक्ष यह जानना चाहेगा कि नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और इन कार्रवाइयों के परिणाम क्या रहे हैं।

दूसरी ओर, AAP सरकार अपने नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ और तस्करी के खिलाफ की गई कार्रवाई का हवाला देकर अपना पक्ष रख सकती है। सरकार की ओर से पिछली सरकारों के कार्यकाल और नशे की समस्या के पुराने कारणों का मुद्दा भी उठाया जा सकता है।

परविंदर सिंह झोटा की हत्या पर भी हो सकता है हंगामा

नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला भी विधानसभा में चर्चा का विषय बन सकता है। इस घटना के बाद राज्य में नशे के कारोबार और आदत डालने वाली दवाओं की कथित अवैध बिक्री पर नियंत्रण को लेकर सवाल उठे हैं।

विपक्ष इस मामले में सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर सकता है। साथ ही यह मुद्दा भी उठ सकता है कि नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

यह मामला सरकार के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि पंजाब में नशे की समस्या को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस जारी है।

भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी आमने-सामने होंगे दल

विधानसभा सत्र में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भी बहस होने की संभावना है। विपक्ष सरकार के कामकाज और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए विभिन्न मामलों का जिक्र कर सकता है।

AAP सरकार इन आरोपों पर अपना पक्ष रख सकती है और अपनी नीतियों का बचाव कर सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच या अदालत के अंतिम निष्कर्ष के बिना दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव की तैयारी

सत्र के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने की योजना भी चर्चा में रह सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, AAP इस मुद्दे पर सदन में अपना रुख रखने और उनके इस्तीफे की मांग करने की तैयारी में है।

इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। हालांकि, प्रस्ताव के वास्तविक स्वरूप और उस पर आगे की कार्रवाई की स्थिति सदन की कार्यवाही तथा आधिकारिक जानकारी से स्पष्ट होगी।

किसानों और नदी जल अधिकारों पर भी रहेगी नजर

पंजाब सरकार किसानों से जुड़े मुद्दों और राज्य के नदी जल अधिकारों को भी विधानसभा में उठा सकती है। पंजाब में पानी का बंटवारा लंबे समय से संवेदनशील राजनीतिक और प्रशासनिक विषय रहा है।

सरकार राज्य के जल अधिकारों से जुड़े प्रस्तावों के माध्यम से अपना पक्ष रख सकती है। इसके अलावा फसल खरीद, कृषि संबंधी समस्याओं और किसानों के हितों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

इन मुद्दों पर बहस के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के बीच अधिकारों तथा जिम्मेदारियों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिल सकती है।

छह दिन चलेगा विधानसभा सत्र

पंजाब विधानसभा का सत्र 22 से 27 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है। इस दौरान सदन में सरकारी और विधायी कामकाज के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी। सत्र के दौरान कौन-कौन से प्रस्ताव पेश किए जाते हैं और उन पर क्या निर्णय होता है, यह विधानसभा की आधिकारिक कार्यवाही से स्पष्ट होगा।

कुल मिलाकर, छह दिवसीय सत्र में नशा तस्करी, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, किसानों की समस्याओं और नदी जल अधिकारों जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में रह सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि AAP सरकार विपक्ष के सवालों का क्या जवाब देती है और सदन में किन प्रस्तावों पर आगे बढ़ा जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *