28 सितंबर 2026 पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बेअदबी विरोधी कानून को लेकर कहा है कि कानून के कुछ प्रावधानों पर उठाई गई आपत्तियों की समीक्षा और चर्चा की जाएगी, लेकिन इसके मूल उद्देश्य और मुख्य दंडात्मक प्रावधानों को कमजोर नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने रविवार को राज्य सरकार की ओर से गठित सात सदस्यीय समिति के साथ बैठक की, जिसमें Jaagat Jot Sri Guru Granth Sahib Satkar (Amendment) Act, 2026 से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
सात सदस्यीय समिति के साथ हुई बैठक
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य सरकार द्वारा गठित सात सदस्यीय समिति के साथ बैठक की। इस समिति का काम कानून से जुड़े विभिन्न प्रावधानों और उन पर उठाई गई आपत्तियों पर विचार करना है। बैठक में आगे की प्रक्रिया और अकाल तख्त की ओर से गठित पैनल के साथ बातचीत को लेकर भी चर्चा हुई।
मान ने समिति को निर्देश दिया कि वह पहले कानून के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार करे और इसके बाद अकाल तख्त की ओर से गठित समिति के साथ नियमित बैठकें कर सुझावों पर चर्चा करे। सरकार का उद्देश्य बातचीत और सहमति के जरिए जरूरी बदलावों पर विचार करना है।
आजीवन कारावास और भारी जुर्माना मुख्य प्रावधान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि कानून में बेअदबी के मामलों के लिए आजीवन कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान इसकी मुख्य नींव है। उनके अनुसार, इन प्रावधानों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
मान ने कहा कि कानून की भावना और मूल उद्देश्य से समझौता किए बिना अन्य प्रावधानों पर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार कानूनी, संवैधानिक और अन्य संबंधित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उठाई गई आपत्तियों की समीक्षा करेगी।
अकाल तख्त के साथ बातचीत पर जोर
पंजाब सरकार ने कानून को लेकर अकाल तख्त की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर बातचीत का रास्ता अपनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाल तख्त सभी के लिए सर्वोच्च है और सरकार इस पूरी प्रक्रिया को सम्मान और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ाएगी।
राज्य सरकार की समिति को अकाल तख्त की ओर से गठित पैनल के साथ बैठकें करने और उसके सुझावों पर विचार करने के लिए कहा गया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य कानून को लेकर अलग-अलग पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश करना है।
कानून के कुछ प्रावधानों पर उठी हैं आपत्तियां
2026 में पारित किए गए संशोधित कानून में बेअदबी के मामलों में पहले की तुलना में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। हालांकि, अकाल तख्त और कुछ सिख संगठनों ने कानून की कुछ धाराओं और शब्दावली को लेकर आपत्तियां जताई हैं।
इनमें धार्मिक ग्रंथों के स्वरूप, ‘कस्टोडियन’ की भूमिका और रिकॉर्ड रखने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। अकाल तख्त की ओर से इन मुद्दों पर सरकार के सामने बदलाव के सुझाव रखे गए हैं।
कानून में क्या हैं कड़े प्रावधान?
रिपोर्टों के अनुसार, 2026 के संशोधित कानून में श्री गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़ी बेअदबी के कुछ गंभीर मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और ₹25 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। अन्य प्रकार की बेअदबी के लिए भी अलग-अलग सजा और जुर्माने निर्धारित किए गए हैं।
कानून के तहत अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य बनाया गया है। जांच के लिए कम से कम DSP या ACP रैंक के अधिकारी की आवश्यकता का भी प्रावधान बताया गया है।
समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
राज्य सरकार की सात सदस्यीय समिति में पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, दमदमी टकसाल के प्रतिनिधि बाबा साहिब सिंह, संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जसपाल सिंह, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति गुरबीर सिंह, पूर्व IPS अधिकारी एवं पंजाब लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष जतिंदर सिंह औलख और अधिवक्ता प्रीत इंदर पाल सिंह शामिल हैं। दमदमी टकसाल प्रमुख संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा बैठक में ऑनलाइन जुड़े।
आगे क्या होगा?
बैठक के बाद समिति कानून के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से विचार करेगी। इसके बाद अकाल तख्त और SGPC की ओर से गठित संबंधित पैनलों के साथ चर्चा की जाएगी। सरकार ने कहा है कि प्रस्तावित संशोधनों को कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की कसौटी पर भी परखा जाएगा।
अकाल तख्त की ओर से सरकार को कानून से जुड़ी आपत्तियों पर कार्रवाई के लिए समयसीमा भी दी गई थी। अब दोनों पक्षों के बीच होने वाली बैठकों में कानून के विवादित प्रावधानों पर चर्चा महत्वपूर्ण होगी।
