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फगवाड़ा की इनायत गुलाटी ने भारत के लिए बढ़ाया गौरव, जूनियर एशिया बैडमिंटन चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व

7 सितंबर 2026 पंजाब के फगवाड़ा की युवा बैडमिंटन खिलाड़ी इनायत गुलाटी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 14 वर्षीय इनायत चीन में आयोजित जूनियर एशिया बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उनके भारत की जूनियर टीम तक पहुंचने की कहानी मेहनत, अनुशासन और परिवार के लगातार सहयोग की मिसाल है।

सात साल की उम्र में थामा था बैडमिंटन रैकेट

इनायत ने महज सात साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। शुरुआत में उनके माता-पिता ने उन्हें खेल से इसलिए जोड़ा था ताकि पढ़ाई के अलावा वह किसी गतिविधि में भी शामिल रहें और फिट रहें। उस समय परिवार ने शायद ही सोचा होगा कि यही शुरुआत आगे चलकर उन्हें भारतीय टीम तक पहुंचाएगी।

फगवाड़ा में शुरुआती प्रशिक्षण लेने के दौरान इनायत ने कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा दिखाई और जिला स्तर पर चैंपियन बनीं। उनकी लगातार प्रगति को देखते हुए परिवार ने उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धी माहौल देने के लिए जालंधर की रट्टी बैडमिंटन अकादमी में दाखिला दिलाया।

जालंधर की रट्टी बैडमिंटन अकादमी में मिली नई दिशा

इनायत जालंधर की रट्टी बैडमिंटन अकादमी में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे सचिन रट्टी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेती हैं। बेहतर कोचिंग और नियमित अभ्यास ने उनके खेल को और मजबूत किया।

इससे पहले जुलाई 2026 में ही इनायत का चयन भारतीय सब-जूनियर बैडमिंटन टीम के लिए हुआ था। उन्होंने बेंगलुरु में आयोजित ऑल इंडिया सब-जूनियर रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट के अंडर-15 मिश्रित युगल मुकाबले में रजत पदक जीतकर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई थी।

भारत की टीम तक पहुंचना बड़ी उपलब्धि

इनायत की चीन यात्रा उनके खेल करियर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनकी मां शिवानी गुलाटी के अनुसार, अब तक परिवार का कोई न कोई सदस्य उनके टूर्नामेंट और प्रशिक्षण के दौरान उनके साथ रहता था। हालांकि भारतीय टीम के साथ चीन जाना उनके लिए पहली ऐसी अंतरराष्ट्रीय यात्रा है, जिसमें उनके माता-पिता में से कोई उनके साथ नहीं गया।

यह उनके खेल में बढ़ते आत्मविश्वास और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान को भी दर्शाता है।

रोजाना सुबह जल्दी शुरू होती है ट्रेनिंग

इनायत की सफलता के पीछे उनकी कड़ी दिनचर्या भी अहम है। उनकी मां ने पहले बताया था कि इनायत गर्मी, सर्दी या बारिश की परवाह किए बिना सुबह करीब 4 बजे उठकर जालंधर में अभ्यास के लिए निकलती हैं।

वह सुबह लगभग 5 बजे प्रशिक्षण शुरू करती हैं। अभ्यास, आराम और पढ़ाई के बीच तालमेल बनाते हुए वह खेल पर लगातार ध्यान देती हैं। ऑनलाइन ट्यूशन के माध्यम से वह स्कूल की पढ़ाई भी जारी रखती हैं।

खेल ने व्यक्तित्व में भी किया बदलाव

इनायत की मां शिवानी गुलाटी का मानना है कि बैडमिंटन ने उनकी बेटी के व्यक्तित्व में भी सकारात्मक बदलाव किया है। उनके अनुसार, खेल ने इनायत की सोच को अधिक मजबूत बनाया और उनकी समझने की क्षमता को भी बेहतर किया।

इनायत के लिए बैडमिंटन अब केवल एक खेल नहीं बल्कि उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

पंजाब की युवा प्रतिभाओं की बढ़ती पहचान

इनायत का भारतीय टीम तक पहुंचना पंजाब में उभर रही युवा बैडमिंटन प्रतिभाओं की तस्वीर को भी सामने लाता है। इससे पहले होशियारपुर की तनवी शर्मा भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पंजाब का नाम रोशन कर चुकी हैं। हाल ही में उन्होंने अपना पहला BWF World Tour खिताब जीतकर महिला सिंगल्स का ताइपे ओपन Super 300 खिताब अपने नाम किया था।

इनायत की उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब पंजाब के कई युवा शटलर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बना रहे हैं।

परिवार के सहयोग ने बनाया सफर आसान

इनायत की खेल यात्रा में उनके माता-पिता का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा है। उनके पिता गगन गुलाटी फगवाड़ा में अपना कारोबार चलाते हैं और लंबे समय तक बेटी के टूर्नामेंट और प्रशिक्षण के दौरान उनके साथ जाते रहे हैं।

लगातार अभ्यास, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और बेहतर प्रशिक्षण के लिए परिवार ने हर स्तर पर उनका समर्थन किया। इसी वजह से इनायत कम उम्र में ही जिला स्तर से राष्ट्रीय और अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकीं।

आगे बड़े मंच पर पहचान बनाने की उम्मीद

महज 14 साल की उम्र में भारतीय टीम का हिस्सा बनना इनायत के लिए बड़ी उपलब्धि है। जूनियर एशिया बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण अनुभव साबित हो सकता है।

उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि कम उम्र में सही प्रशिक्षण, लगातार मेहनत और परिवार के सहयोग से छोटे शहरों से निकलने वाले खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं।

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