8 अक्टूबर 2026: पटियाला के Yadavindra Public School (YPS) के छात्र कबीर सिंह शेरगिल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कबीर ने John Locke Institute के Global Essay Prize के जूनियर वर्ग में इतिहास विषय के लिए तीसरा पुरस्कार जीतकर भारत का नाम रोशन किया है। खास बात यह है कि वह इस श्रेणी में इतिहास विषय का पुरस्कार जीतने वाले भारत के पहले छात्र बने हैं। उन्हें पिछले सप्ताह लंदन में आयोजित पुरस्कार समारोह में सम्मानित किया गया।
183 देशों के 1 लाख से ज्यादा छात्रों ने लिया हिस्सा
इस वर्ष John Locke Institute के Global Essay Prize में दुनिया के 183 देशों से 1,00,227 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले में कबीर का तीसरा स्थान हासिल करना उनकी लेखन क्षमता और विषय पर गहरी समझ को दर्शाता है।
लंदन में आयोजित तीन दिवसीय अकादमिक कॉन्फ्रेंस और अवॉर्ड वीकेंड में दुनिया के अलग-अलग देशों से आए फाइनलिस्टों ने हिस्सा लिया। इस दौरान कई प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और विश्वविद्यालयों से जुड़े विशेषज्ञों ने भी छात्रों के साथ चर्चा की।
किस विषय पर था कबीर का विजेता निबंध?
कबीर के पुरस्कार विजेता निबंध का विषय काफी अलग और विचारोत्तेजक था। उन्होंने सवाल उठाया था— “Does Che deserve his iconic T-shirt?”, यानी क्या चे ग्वेरा अपनी टी-शर्ट पर छपी मशहूर तस्वीर के लिए वास्तव में उतने ही प्रतिष्ठित हैं?
कबीर ने अपने निबंध में तर्क दिया कि चे ग्वेरा की टी-शर्ट पर दिखाई देने वाली प्रसिद्ध तस्वीर धीरे-धीरे उनके वास्तविक ऐतिहासिक व्यक्तित्व की जगह एक सरल सांस्कृतिक प्रतीक बन गई है। उनके अनुसार, लोग अक्सर इस तस्वीर को उसके ऐतिहासिक संदर्भ के बजाय एक फैशन या लोकप्रिय संस्कृति के प्रतीक के रूप में देखते हैं।
दिल्ली के संग्रहालय में की गई रिसर्च का भी किया इस्तेमाल
कबीर ने अपने निबंध के लिए नई दिल्ली के एक संग्रहालय में की गई अपनी रिसर्च का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने चे ग्वेरा की लोकप्रिय तस्वीर की तुलना औपनिवेशिक दौर के वायसरायों के उन चित्रों से की, जिनमें ऐतिहासिक घटनाओं या व्यक्तित्वों का केवल एक पक्ष सामने आता है।
अपने तर्क के आधार पर कबीर ने निष्कर्ष निकाला कि चे ग्वेरा की टी-शर्ट वाली तस्वीर अब उनके क्रांतिकारी विचारों को याद करने से ज्यादा उपभोक्तावाद यानी consumerism का प्रतीक बन चुकी है।
लंदन में सम्मान मिलने पर कबीर ने क्या कहा?
पुरस्कार मिलने के बाद कबीर ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जब लंदन में उनका नाम पुकारा गया तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता का स्तर काफी ऊंचा था और उन्हें जीत की उम्मीद नहीं थी।
कबीर ने दुनिया भर के छात्रों और शिक्षाविदों के साथ तीन दिन बिताने को अपने लिए यादगार अनुभव बताया। उन्होंने नेतृत्व और समकालीन मुद्दों पर हुई चर्चाओं को भी महत्वपूर्ण बताया और अपनी सफलता के लिए शिक्षकों तथा परिवार के सहयोग के प्रति आभार जताया।
ऑक्सफोर्ड समर प्रोग्राम के लिए मिली स्कॉलरशिप
कबीर को पुरस्कार के साथ ऑक्सफोर्ड में समर प्रोग्राम के लिए स्कॉलरशिप भी मिली है। John Locke Institute की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रतियोगिता में अलग-अलग विषयों और श्रेणियों में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल करने वाले छात्रों को कार्यक्रमों के लिए स्कॉलरशिप दी जाती है।
दुनिया के प्रतिष्ठित अकादमिकों से जुड़ा प्रतियोगिता मंच
John Locke Institute का Global Essay Prize स्कूली छात्रों को इतिहास, दर्शन, राजनीति, अर्थशास्त्र और कानून सहित विभिन्न विषयों पर मौलिक विचार और तर्क प्रस्तुत करने का अवसर देता है। संस्थान के अनुसार, प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्र हिस्सा लेते हैं और निबंधों का मूल्यांकन वरिष्ठ शिक्षाविदों द्वारा किया जाता है।
कबीर की यह उपलब्धि Yadavindra Public School, Patiala के लिए भी गौरव का विषय है। स्कूल लंबे समय से शिक्षा के साथ छात्रों के समग्र विकास, लेखन, बहस और अकादमिक गतिविधियों पर जोर देता रहा है।
कुल मिलाकर, पटियाला के YPS छात्र कबीर सिंह शेरगिल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करते हुए John Locke Institute के Global Essay Prize के जूनियर इतिहास वर्ग में तीसरा पुरस्कार हासिल किया है। उनका निबंध Che Guevara की प्रसिद्ध टी-शर्ट वाली तस्वीर और उसके बदलते सांस्कृतिक अर्थ पर केंद्रित था। इस उपलब्धि के साथ कबीर इतिहास श्रेणी में यह पुरस्कार जीतने वाले भारत के पहले छात्र बन गए हैं।
