24 अगस्त 2026 सिख धर्म की व्यापक आध्यात्मिक विरासत और उसमें विभिन्न संतों की वाणी को संरक्षित करने के उद्देश्य से लेखक और शोधकर्ता अमरदीप सिंह ने ‘Oneness in Diversity’ नाम से एक महत्वपूर्ण परियोजना शुरू की है। इस परियोजना के तहत श्री गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज 1,656 शबदों (पदों) को ऑनलाइन आर्काइव के रूप में संरक्षित किया जा रहा है।
अलग-अलग संतों की वाणी को किया जा रहा संरक्षित
इस ऑनलाइन आर्काइव में गुरु नानक देव जी के साथ-साथ विभिन्न संतों और भगतों की वाणी शामिल की जा रही है। इनमें भगत कबीर, भगत रविदास, शेख फरीद, भगत नामदेव, भगत रामानंद, भगत जयदेव, भगत त्रिलोचन, भगत साधना, भगत सैण, भगत पीपा, भगत धन्ना, भगत सूरदास, भगत परमानंद, भगत भीखन, भगत बेनी और भाई मरदाना की रचनाएं शामिल हैं।
कलाकारों की आवाज में रिकॉर्ड किए जा रहे शबद
परियोजना के तहत शबदों की प्रस्तुतियां रिकॉर्ड की जा रही हैं। इन्हें कलाकार सतनिंदर बोदल और सलीमा ख्वाजा की आवाज में रिकॉर्ड किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल लिखित रूप में सामग्री सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गुरबाणी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को ऑडियो माध्यम से भी उपलब्ध कराना है।
2023 में शुरू हुई पांच साल की परियोजना
‘Oneness in Diversity’ परियोजना को जनवरी 2023 में शुरू किया गया था और इसके पहले चरण को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद 2027 से 2032 के बीच परियोजना के दूसरे चरण में 4,300 से अधिक अन्य शबदों को भी आर्काइव में शामिल करने की योजना है।
दूसरे चरण में गुरु अंगद देव जी, गुरु अमर दास जी, गुरु राम दास जी, गुरु अर्जन देव जी, गुरु तेग बहादुर जी और विभिन्न भट्टों की रचनाओं के साथ उनके जीवन और ऐतिहासिक संदर्भों से जुड़ी जानकारी भी शामिल की जाएगी।
गुरु नानक की शिक्षाओं को व्यापक संदर्भ में समझने की कोशिश
जालंधर में आयोजित कार्यक्रम में अमरदीप सिंह ने अपनी परियोजना के उद्देश्य पर बात करते हुए कहा कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को केवल किसी एक क्षेत्र या सीमित धार्मिक पहचान के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, गुरु नानक ने अलग-अलग संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की महत्वपूर्ण आवाजों को स्वीकार किया और उन्हें एक व्यापक आध्यात्मिक दृष्टि में स्थान दिया।
अमरदीप सिंह ने कहा कि इस विरासत को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित करना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इसे समझ और आगे बढ़ा सकें।
पाकिस्तान में सिख विरासत पर भी किया शोध
अमरदीप सिंह ने सिख विरासत पर लंबे समय तक शोध किया है। उन्होंने पाकिस्तान में मौजूद सिख गुरुद्वारों, ऐतिहासिक इमारतों, स्मारकों और ननकपंथी समुदायों पर भी शोध किया है। इस विषय पर उनकी पुस्तकें ‘Lost Heritage: The Sikh Legacy in Pakistan’ और ‘The Quest Continues: Lost Heritage: The Sikh Legacy in Pakistan’ प्रकाशित हो चुकी हैं।
विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास
परियोजना का मुख्य उद्देश्य गुरबाणी और उससे जुड़े बहुआयामी सांस्कृतिक इतिहास को डिजिटल माध्यम से सुरक्षित करना है। आयोजकों के अनुसार, यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों को यह समझने में मदद करेगा कि गुरु ग्रंथ साहिब की वाणी में अलग-अलग संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की आवाजें किस तरह एक व्यापक संदेश का हिस्सा बनीं।
कुल मिलाकर, ‘Oneness in Diversity’ परियोजना के जरिए 1,656 गुरबाणी शबदों को ऑनलाइन आर्काइव में संरक्षित किया जा रहा है। परियोजना का पहला चरण 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि अगले चरण में 4,300 से अधिक अतिरिक्त शबदों और उनके रचनाकारों से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी को शामिल करने की योजना है।
