19 जून 2026 : Omraje Nimbalkar ने राजनीतिक बगावत के बाद पहली बार खुलकर अपनी स्थिति पर बात की है। उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने के फैसले को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उन्होंने कहा कि उस समय वह एक बड़े धर्मसंकट में थे और परिस्थितियां बेहद जटिल थीं।
ओमराजे ने कहा कि राजनीति में कई बार ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं जो व्यक्तिगत भावनाओं और राजनीतिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की मांग करते हैं। उनके अनुसार, उन्होंने जो भी निर्णय लिया, वह काफी सोच-विचार और परिस्थितियों का आकलन करने के बाद लिया गया था।
Uddhav Thackeray के नेतृत्व को लेकर उन्होंने सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मन में आज भी आदर है। हालांकि, बदलते राजनीतिक हालात और क्षेत्रीय हितों को देखते हुए उन्हें अलग रास्ता चुनना पड़ा।
निष्ठा पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए ओमराजे ने कहा कि निष्ठा केवल किसी एक नेता या दल के प्रति नहीं होती, बल्कि जनता और मतदाताओं के प्रति भी होती है। उन्होंने कहा कि जनहित को ध्यान में रखते हुए कई बार कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं।
महाराष्ट्र में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद कई नेताओं ने अपने राजनीतिक रुख बदले थे। इसी संदर्भ में ओमराजे का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके इस स्पष्टीकरण से राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ सकती है।
उनके बयान के बाद समर्थकों और विरोधियों दोनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग उनके फैसले को परिस्थितियों की मजबूरी बता रहे हैं, जबकि कुछ अब भी उनके रुख पर सवाल उठा रहे हैं।
