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लुधियाना के खन्ना क्षेत्र के किसान ने छह वर्षों से नहीं की पराली जलाने की घटना, पर्यावरण संरक्षण में पेश की अनूठी मिसाल

24 जून 2026 :  Khanna क्षेत्र के एक प्रगतिशील किसान ने पिछले छह वर्षों से पराली न जलाकर पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती की दिशा में उल्लेखनीय उदाहरण पेश किया है। किसान के इस प्रयास को क्षेत्र में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।

किसान ने बताया कि पराली जलाने के बजाय उसने फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए वैकल्पिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया। इन उपायों से न केवल खेत की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिली, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा।

विशेषज्ञों के अनुसार, पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी के उपयोगी सूक्ष्म जीवों को नुकसान पहुंचता है। इसके विपरीत, फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण और कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए लाभकारी माना जाता है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि इस किसान की पहल ने उन्हें भी वैकल्पिक तकनीकों और आधुनिक कृषि पद्धतियों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया है। कई किसान अब पराली प्रबंधन के नए तरीकों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उदाहरण किसानों के बीच जागरूकता फैलाने और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार और कृषि विभाग भी समय-समय पर किसानों को पराली प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करते रहे हैं।

इस किसान की उपलब्धि को ग्रामीण समुदाय में सराहना मिल रही है। पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती की दिशा में उसका प्रयास यह दिखाता है कि व्यक्तिगत स्तर पर उठाए गए कदम भी बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं।

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