9 जून 2026 : National Green Tribunal ने एक बार फिर Punjab सरकार को खनन गतिविधियों की अनुमति देने से रोक दिया है। ट्रिब्यूनल के इस आदेश को पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने खनन से जुड़े विभिन्न पर्यावरणीय पहलुओं पर चिंता जताई। ट्रिब्यूनल का मानना है कि किसी भी खनन गतिविधि को अनुमति देने से पहले पर्यावरणीय नियमों, प्रभाव आकलन और कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
आदेश के अनुसार, संबंधित क्षेत्रों में खनन की अनुमति देने से पहले सभी आवश्यक शर्तों और पर्यावरणीय मानकों की समीक्षा की जानी चाहिए। ट्रिब्यूनल ने इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
खनन गतिविधियों से जुड़े मामलों में अक्सर नदी तंत्र, भूजल स्तर, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव को लेकर चिंताएं उठती रही हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अनियंत्रित या नियमों के विपरीत खनन से दीर्घकालिक पर्यावरणीय नुकसान हो सकता है।
दूसरी ओर, खनन उद्योग से जुड़े पक्षों का तर्क है कि निर्माण और विकास परियोजनाओं के लिए खनिज संसाधनों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि उचित नियमों और निगरानी के साथ खनन गतिविधियों का संचालन किया जा सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, एनजीटी का उद्देश्य विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है। ऐसे मामलों में ट्रिब्यूनल यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि सभी गतिविधियां पर्यावरणीय कानूनों और न्यायिक निर्देशों के अनुरूप हों।
फिलहाल ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद संबंधित विभागों और हितधारकों की नजर आगामी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर है। मामले में आगे की सुनवाई और निर्देशों के आधार पर भविष्य की कार्रवाई तय की जाएगी।
