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पंजाब के मलेरकोटला के मोहम्मद यासिर ने एशियन पैरा गेम्स में रचा इतिहास, शॉट पुट में 15.06 मीटर थ्रो के साथ जीता सिल्वर मेडल

21 अक्तूबर 2026:   पंजाब के मलेरकोटला के पैरा एथलीट मोहम्मद यासिर ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए शॉट पुट स्पर्धा में सिल्वर मेडल अपने नाम किया है। जापान में आयोजित प्रतियोगिता में यासिर ने 15.06 मीटर का थ्रो करके दूसरा स्थान हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि से पंजाब और पूरे देश में खुशी का माहौल है। खास बात यह रही कि पुरुषों की शॉट पुट F46 स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदकों पर कब्जा जमाया।

यासिर की यह सफलता वर्षों की मेहनत, निरंतर अभ्यास और मजबूत इच्छाशक्ति का परिणाम है। बचपन में एक हादसे के कारण उनका बायां हाथ प्रभावित हुआ था, लेकिन उन्होंने खेल के प्रति अपने जुनून को कभी कम नहीं होने दिया। आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के लिए पदक जीत रहे हैं।

15.06 मीटर के थ्रो से जीता सिल्वर मेडल

एशियन पैरा गेम्स में पुरुषों की शॉट पुट F46 स्पर्धा में भारत के सचिन सरजेराव खिलारी ने 15.87 मीटर के गेम्स रिकॉर्ड थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता। मोहम्मद यासिर ने 15.06 मीटर का थ्रो करके सिल्वर मेडल हासिल किया, जबकि भारत के प्रवीण ने 14.94 मीटर के थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

इस तरह भारतीय खिलाड़ियों ने इस स्पर्धा में गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। यासिर का 15.06 मीटर का थ्रो उनका सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। यह उपलब्धि उनके लगातार बेहतर होते खेल और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अनुभव को दर्शाती है।

बचपन में हादसे के बाद भी नहीं छोड़ा खेल का जुनून

मोहम्मद यासिर की सफलता की कहानी संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है। पंजाब के मलेरकोटला क्षेत्र की अमरगढ़ तहसील से संबंध रखने वाले यासिर का बचपन एक गंभीर हादसे से प्रभावित हुआ था। जब वह करीब पांच साल के थे, तब चारा काटने वाली मशीन में उनका बायां हाथ फंस गया, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई और उनका हाथ प्रभावित हो गया।

इस घटना ने उनके परिवार को मुश्किल दौर में डाल दिया था। उनके पिता सौदागर खान ने बताया कि हादसे के बाद परिवार को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन यासिर की खेलों में रुचि हमेशा बनी रही।

यासिर ने भी अपनी शारीरिक स्थिति को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वह बचपन से ही खेलों में रुचि रखते थे और शुरुआत में वॉलीबॉल तथा कबड्डी खेलते थे। बाद में उन्होंने शॉट पुट को अपना मुख्य खेल बनाया और इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया।

कोच ने पहचानी प्रतिभा, 10 साल से अधिक समय से कर रहे अभ्यास

यासिर की प्रतिभा को मलेरकोटला के एथलेटिक्स कोच हरमिंदर पाल सिंह घुम्मन ने पहचाना। कॉलेज स्तर पर प्रतियोगिता में हिस्सा लेते समय कोच की नजर उनके प्रदर्शन पर पड़ी। उन्होंने यासिर की क्षमता को समझा और उन्हें शॉट पुट का प्रशिक्षण देना शुरू किया।

कोच घुम्मन के मार्गदर्शन में यासिर ने तकनीक, ताकत और अभ्यास पर लगातार काम किया। उनके प्रशिक्षण को एक दशक से अधिक समय हो चुका है। कोच का मानना था कि यासिर में शॉट पुट में अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता है और उनकी मेहनत ने इस विश्वास को सही साबित किया।

यासिर को खेलों में उनकी उपलब्धियों के लिए महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार भी मिल चुका है। यह सम्मान उनकी खेल यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

2018 में भी जीत चुके हैं एशियन पैरा गेम्स में पदक

मोहम्मद यासिर के लिए एशियन पैरा गेम्स में पदक जीतना पहली उपलब्धि नहीं है। इससे पहले उन्होंने 2018 में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था। इसके अलावा, उन्होंने 2021 में दुबई में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में 14.58 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता था।

हालांकि, उनका सफर हमेशा आसान नहीं रहा। 2023 के एशियन पैरा गेम्स में चोट के कारण वह अपनी उम्मीदों के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाए थे। इसके बाद उन्होंने पेरिस पैरालंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना अनुभव बढ़ाया।

अब 2026 के एशियन पैरा गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने एक बार फिर साबित किया है कि निरंतर मेहनत और मजबूत इरादों के दम पर मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद सफलता हासिल की जा सकती है। <Cite refs={[“turn328992news3″,”turn328992news4”]}/>

महंगे खेल उपकरण भी बड़ी चुनौती

यासिर की सफलता के पीछे उनके परिवार का योगदान भी अहम रहा है। उनके पिता सौदागर खान ने बताया कि खिलाड़ी के रूप में करियर जारी रखना आर्थिक रूप से आसान नहीं है। विशेष खेलों के लिए इस्तेमाल होने वाले जूते काफी महंगे होते हैं। एक जोड़ी की कीमत करीब 12 हजार रुपये तक होती है और लगातार अभ्यास के कारण कुछ महीनों में उन्हें बदलना पड़ता है।

ऐसे खर्चों के बावजूद परिवार ने यासिर का साथ दिया और उन्हें खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके पिता को बेटे की उपलब्धि पर गर्व है। परिवार का समर्थन और कोच का मार्गदर्शन उनकी यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

अब और आगे बढ़ने का लक्ष्य

सिल्वर मेडल जीतने के बाद यासिर की नजरें भविष्य की प्रतियोगिताओं पर हैं। उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षा जाहिर करते हुए कहा, “अभी तो और ऊपर जाना है।” उनका यह संदेश बताता है कि वह मौजूदा उपलब्धि से संतुष्ट होकर रुकना नहीं चाहते, बल्कि अपने प्रदर्शन में और सुधार करना चाहते हैं।

मोहम्मद यासिर की यह उपलब्धि पंजाब के उभरते खिलाड़ियों और पैरा एथलीटों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने दिखाया है कि शारीरिक चुनौतियां किसी खिलाड़ी के सपनों की सीमा तय नहीं करतीं। सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और लगातार मेहनत के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।

एशियन पैरा गेम्स 2026 में यासिर का सिल्वर मेडल भारत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया है। अब उनके प्रशंसकों को उम्मीद है कि वह आने वाली प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन करेंगे और देश के लिए और पदक जीतेंगे।

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