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16 साल से व्हीलचेयर के सहारे शिक्षक, लेकिन हौसले के आगे नहीं आई कोई बाधा

5 सितंबर 2026   दिव्यांगता किसी व्यक्ति के सपनों और उसकी क्षमता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती, अगर हौसला मजबूत हो। पंजाब के लुधियाना में शिक्षक विकास कुमार इसकी मिसाल बने हुए हैं। 75 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद वह पिछले कई वर्षों से व्हीलचेयर के सहारे स्कूल पहुंचकर विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं।

विकास कुमार शहीद करतार सिंह सराभा सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल, सराभा में वर्ष 2011 से पढ़ा रहे हैं। करीब 16 वर्षों से व्हीलचेयर ही उनके आवागमन का मुख्य सहारा है, लेकिन उन्होंने अपनी शारीरिक स्थिति को कभी अपने पेशेवर जीवन के आड़े नहीं आने दिया।

75 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद जारी है शिक्षण कार्य

विकास कुमार 75 प्रतिशत दिव्यांगता के साथ अपनी शिक्षण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। रोजमर्रा के कामों और स्कूल तक पहुंचने के लिए उन्हें व्हीलचेयर की जरूरत पड़ती है, लेकिन इसके बावजूद वह नियमित रूप से विद्यार्थियों के बीच मौजूद रहते हैं।

उनकी कहानी यह बताती है कि शारीरिक चुनौतियां किसी व्यक्ति की प्रतिभा, मेहनत और जिम्मेदारी को सीमित नहीं कर सकतीं। शिक्षक दिवस के अवसर पर उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण विशेष रूप से प्रेरणादायक बनकर सामने आया है।

2011 से सराभा स्कूल में दे रहे सेवाएं

विकास कुमार वर्ष 2011 से शहीद करतार सिंह सराभा सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल में कार्यरत हैं। इतने लंबे समय से वह स्कूल में विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ-साथ उन्हें व्यावसायिक शिक्षा से जुड़ी जानकारी भी दे रहे हैं।

उनकी जिम्मेदारी केवल कक्षा में पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं है। वह वरिष्ठ कक्षाओं के विद्यार्थियों को उनके भविष्य और रोजगार से जुड़े विषयों की समझ विकसित करने में भी मदद करते हैं।

कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं

विकास कुमार एक वोकेशनल शिक्षक हैं और स्कूल में कक्षा 11वीं तथा 12वीं के विद्यार्थियों को Exports, Imports and Management से संबंधित प्रशिक्षण देते हैं।

इस तरह के विषय विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक और रोजगार से जुड़ी जानकारी हासिल करने में मदद करते हैं। विकास कुमार अपने अनुभव और मेहनत के जरिए विद्यार्थियों को इन विषयों को समझाने का काम कर रहे हैं।

विद्यार्थियों का प्रदर्शन भी रहा शानदार

विकास कुमार के मार्गदर्शन में पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने लगातार 100 प्रतिशत परिणाम हासिल किए हैं। यह उपलब्धि उनके शिक्षण के प्रति समर्पण और विद्यार्थियों की मेहनत दोनों को दर्शाती है।

एक शिक्षक के लिए इससे बड़ी उपलब्धि शायद ही कोई हो कि उसके विद्यार्थियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहे। विकास कुमार की कहानी में यही पहलू उन्हें दूसरे शिक्षकों और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनाता है।

व्हीलचेयर बनी सहारा, बाधा नहीं

पिछले 16 वर्षों में व्हीलचेयर विकास कुमार की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। स्कूल आने-जाने से लेकर अपने कार्यस्थल पर विद्यार्थियों के बीच रहने तक वह इसी के सहारे अपनी दिनचर्या पूरी करते हैं।

लेकिन उनकी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि व्हीलचेयर उनकी पहचान या उनकी क्षमता की सीमा नहीं बनी। उन्होंने इसे केवल अपने आवागमन का साधन बनाया और अपने पेशे को पूरी निष्ठा के साथ जारी रखा।

विद्यार्थियों के लिए बने प्रेरणा

शिक्षक का प्रभाव केवल किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहता। विद्यार्थियों के सामने शिक्षक का व्यवहार, संघर्ष और मेहनत भी एक सीख बन जाता है।

विकास कुमार की दृढ़ता उनके विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। शारीरिक चुनौती के बावजूद लगातार स्कूल जाना और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देना यह संदेश देता है कि मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ा जा सकता है।

दिव्यांगता को लेकर बदलती सोच की जरूरत

विकास कुमार की कहानी समाज के सामने दिव्यांगता को लेकर सोच बदलने का अवसर भी देती है। किसी व्यक्ति की शारीरिक स्थिति को उसकी क्षमता का पैमाना नहीं माना जाना चाहिए।

अगर कार्यस्थल पर उचित सुविधाएं, सम्मान और अवसर उपलब्ध हों तो दिव्यांग लोग भी अपनी योग्यता के अनुसार महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। शिक्षा जैसे क्षेत्र में ऐसी कहानियां समावेशी कार्यस्थल की जरूरत को और मजबूत करती हैं।

शिक्षक दिवस पर कहानी बनी मिसाल

शिक्षक दिवस के मौके पर विकास कुमार की कहानी खास महत्व रखती है। एक शिक्षक के रूप में उन्होंने लंबे समय तक विद्यार्थियों के साथ काम किया है और अपनी व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद शिक्षा को प्राथमिकता दी है।

उनकी यात्रा यह बताती है कि शिक्षक केवल कक्षा में ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि उसका अपना संघर्ष भी विद्यार्थियों को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण दे सकता है।

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