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गर्मी बढ़ते ही बढ़ी मिट्टी के घड़ों की मांग, लुधियाना की घुमार मंडी आज भी पारंपरिक शीतल जल संस्कृति को संजोए हुए

13  जून 2026 : Ludhiana में गर्मी के लौटते ही मिट्टी के घड़ों और मटकों की मांग एक बार फिर बढ़ने लगी है। शहर की प्रसिद्ध घुमार मंडी आज भी इस पारंपरिक विरासत को जीवित रखे हुए है, जहां बड़ी संख्या में लोग प्राकृतिक रूप से ठंडा पानी रखने के लिए मिट्टी के बर्तनों की खरीदारी कर रहे हैं।

Ghumar Mandi लंबे समय से मिट्टी के घड़ों, सुराहियों और अन्य पारंपरिक बर्तनों के लिए जानी जाती है। आधुनिक रेफ्रिजरेटर और कूलिंग तकनीकों के दौर में भी कई परिवार गर्मियों में मिट्टी के घड़ों का उपयोग करना पसंद करते हैं।

कारीगरों का कहना है कि मिट्टी के घड़े न केवल पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखते हैं, बल्कि उनमें संग्रहित पानी का स्वाद भी अलग और ताज़गीभरा होता है। यही कारण है कि हर वर्ष गर्मियों में इनकी मांग बढ़ जाती है।

पर्यावरण विशेषज्ञ भी मिट्टी के बर्तनों को प्लास्टिक और ऊर्जा-आधारित शीतलन उपकरणों की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प मानते हैं। इससे स्थानीय कुम्हार समुदाय को भी रोजगार मिलता है और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा मिलता है।

घुमार मंडी में आज भी यह परंपरा नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी के बीच एक सांस्कृतिक सेतु का काम कर रही है। बढ़ती गर्मी के बीच मिट्टी के घड़े लोगों को प्राकृतिक और पारंपरिक जीवनशैली की याद दिला रहे हैं।

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