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110 पशु, 35 एकड़ जमीन और वाहनों की पूरी फ्लीट, लुधियाना की करमजीत कौर ने ऐसे खड़ा किया डेयरी कारोबार

8 अक्टूबर 2026:  पंजाब के ग्रामीण इलाकों में खेती और पशुपालन को अक्सर पारंपरिक काम के तौर पर देखा जाता है, लेकिन लुधियाना की करमजीत कौर ने इसे अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता और पहचान का जरिया बना दिया है। रत्तोवाल गांव की रहने वाली 49 वर्षीय करमजीत कौर खेती और डेयरी फार्मिंग दोनों को बेहद व्यवस्थित तरीके से संभाल रही हैं। उनके डेयरी फार्म में 110 से अधिक गाय और भैंस हैं, जिनसे रोजाना करीब 10 क्विंटल दूध का उत्पादन होता है। वह खुद दूध को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का काम भी करती हैं।

110 से ज्यादा गाय-भैंसों का संभालती हैं डेयरी फार्म

करमजीत कौर का डेयरी कारोबार काफी बड़ा है। उनके फार्म में 110 से अधिक गाय और भैंस हैं। इन पशुओं से रोजाना लगभग 10 क्विंटल दूध तैयार होता है। खास बात यह है कि दूध की सप्लाई के लिए वह किसी दूसरे व्यक्ति पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहतीं, बल्कि खुद भी उपभोक्ताओं तक दूध पहुंचाती हैं।

डेयरी के साथ-साथ वह अपने खेतों की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। उनके पास करीब 35 एकड़ कृषि भूमि है, जहां रोटेशन के आधार पर अलग-अलग फसलें उगाई जाती हैं। इस तरह उनका काम केवल पशुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती और डेयरी दोनों का एक साथ संचालन करती हैं।

बाइक से लेकर ट्रैक्टर तक खुद चलाती हैं

करमजीत कौर की कहानी का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि वह अपने रोजमर्रा के कामों के लिए अलग-अलग वाहन खुद चलाती हैं। वह मोटरसाइकिल, ऑटो रिक्शा, स्कॉर्पियो और ट्रैक्टर चलाती हैं।

उन्होंने बताया कि विमान और ट्रेन को छोड़कर वह लगभग हर तरह का वाहन चला सकती हैं। खेतों और डेयरी से जुड़े कामों के लिए वाहन चलाना उनके रोजमर्रा के काम का हिस्सा बन चुका है। इससे यह भी पता चलता है कि उन्होंने अपने काम को केवल एक जिम्मेदारी के तौर पर नहीं, बल्कि पूरी तरह अपने जीवन का हिस्सा बनाया है।

शाम तक दूध की सप्लाई में रहती हैं व्यस्त

करमजीत कौर के लिए दिन केवल खेतों में काम करने तक सीमित नहीं रहता। शाम के समय भी वह लंबे समय तक दूध की सप्लाई में व्यस्त रहती हैं। बड़ी मात्रा में दूध तैयार होने के कारण इसे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।

वह अपने ग्राहकों को खुद दूध उपलब्ध कराती हैं। इस तरह पशुओं की देखभाल, खेतों का काम और दूध की सप्लाई—इन सभी जिम्मेदारियों को वह एक साथ संभाल रही हैं।

भाई ने कनाडा की PR छोड़कर वापस लौटने का फैसला किया

करमजीत कौर की मेहनत और डेयरी कारोबार की सफलता का असर उनके परिवार पर भी पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, उनके छोटे भाई ने कनाडा में कई साल रहने के बाद वहां की PR छोड़कर भारत वापस आने और उनके कारोबार में साथ देने का फैसला किया।

यह फैसला बताता है कि परिवार ने खेती और डेयरी को केवल पारंपरिक पेशा नहीं माना, बल्कि इसे एक मजबूत व्यवसाय के रूप में देखा। भाई के वापस आने से करमजीत कौर को अपने काम में सहयोग भी मिला।

शादी नहीं की, लेकिन अपने फैसले पर कायम रहीं

करमजीत कौर ने बताया कि शादी नहीं करने के फैसले को लेकर उन्हें रिश्तेदारों की आलोचना और ताने भी सुनने पड़े। हालांकि, उनके माता-पिता ने उनके खेती के प्रति जुनून को समझा और उन पर शादी के लिए दबाव नहीं बनाया।

आज करमजीत अपने परिवार के साथ रहती हैं और अपने काम में व्यस्त रहती हैं। उनका कहना है कि वह अपने जीवन से संतुष्ट हैं और अपने फैसलों को लेकर किसी तरह का पछतावा नहीं है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता को मानती हैं बड़ी ताकत

करमजीत कौर महिलाओं के लिए आर्थिक स्वतंत्रता को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। उनका कहना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर होना चाहिए ताकि उन्हें अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।

उनके अनुसार, आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उन्हें अपनी जरूरतों और इच्छाओं के लिए खुद निर्णय लेने की आजादी दी है। वह अपने लिए टीवी, मोबाइल, वाहन जैसी चीजें खरीद सकती हैं और जरूरत के मुताबिक विदेश यात्रा भी कर सकती हैं।

कारोबार का सालाना टर्नओवर बताने से किया इनकार

जब करमजीत कौर से उनके डेयरी कारोबार के सालाना टर्नओवर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई आंकड़ा नहीं बताया। उन्होंने इसे भगवान की मेहर बताया।

हालांकि, 110 से अधिक पशुओं, रोजाना करीब 10 क्विंटल दूध की सप्लाई और 35 एकड़ जमीन की जिम्मेदारी संभालना उनके काम के बड़े स्तर को दिखाता है। उन्होंने अपने कारोबार को लेकर किसी बड़े दावे के बजाय अपनी मेहनत और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।

महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

करमजीत कौर की कहानी ग्रामीण पंजाब में महिलाओं की भूमिका को लेकर एक अलग तस्वीर पेश करती है। उन्होंने खेती और पशुपालन को केवल घरेलू या पारंपरिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाया।

उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर किसी व्यक्ति में अपने काम के प्रति लगन, आत्मविश्वास और मेहनत हो तो खेती और डेयरी जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में भी आर्थिक मजबूती हासिल की जा सकती है।

कुल मिलाकर, लुधियाना के रत्तोवाल गांव की करमजीत कौर ने खेती और डेयरी फार्मिंग को अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार बनाया है। 110 से अधिक गाय-भैंसों, करीब 35 एकड़ जमीन और रोजाना लगभग 10 क्विंटल दूध की सप्लाई के साथ वह अपने कारोबार को खुद संभाल रही हैं। उनकी कहानी खास तौर पर उन महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है जो आत्मनिर्भर होकर कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं।

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