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कैथल सिविल अस्पताल में कैंसर डे-केयर सेंटर शुरू, किडनी की पथरी का इलाज भी जल्द होगा उपलब्ध

15 अक्तूबर 2026: हरियाणा के कैथल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कैथल के सिविल अस्पताल में कैंसर मरीजों के लिए छह बेड वाला डे-केयर सेंटर शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही अस्पताल में किडनी की पथरी के इलाज के लिए लिथोट्रिप्सी सेवा दोबारा शुरू करने की तैयारी भी तेज हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के इन प्रयासों से जिले के मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है। अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर की सुविधाओं को भी आधुनिक बनाया गया है, जबकि एमआरआई सेवा शुरू करने की योजना पर भी काम चल रहा है।

अस्पताल में शुरू किए गए कैंसर डे-केयर सेंटर का मुख्य उद्देश्य उन मरीजों को कीमोथेरेपी उपलब्ध कराना है, जिनका शुरुआती इलाज अंबाला कैंसर संस्थान या किसी अन्य विशेषज्ञ अस्पताल में हो चुका है और जिन्हें आगे कीमोथेरेपी सत्रों की जरूरत है। ऐसे मरीज अब पात्रता और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार कैथल सिविल अस्पताल में ही अपना आगे का उपचार करवा सकेंगे।

अब तक कई मरीजों को कैंसर के नियमित उपचार और कीमोथेरेपी के लिए दूसरे शहरों के अस्पतालों तक जाना पड़ता था। बार-बार यात्रा करने से मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता था। इसके अलावा, लंबे सफर के कारण शारीरिक परेशानी भी होती थी। स्थानीय अस्पताल में डे-केयर सुविधा मिलने से मरीजों को इन कठिनाइयों से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

कैथल की सिविल सर्जन डॉ. रेणु चावला के अनुसार, सेंटर में दो डॉक्टरों को कीमोथेरेपी से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस सुविधा के माध्यम से मरीजों को उनके जिले में ही उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, कीमोथेरेपी किस मरीज को दी जाएगी, यह उसकी चिकित्सकीय स्थिति और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तय होगा।

कैंसर उपचार के साथ-साथ अस्पताल में किडनी की पथरी के मरीजों के लिए भी राहत की उम्मीद जगी है। अस्पताल में लिथोट्रिप्सी की नई मशीन पहुंच चुकी है और इसे इसी महीने स्थापित करके चालू किए जाने की संभावना है। इस मशीन के माध्यम से उपयुक्त मरीजों की पथरी का उपचार किया जा सकेगा। यह सुविधा लगभग साढ़े पांच साल से बंद पड़ी थी, जिसके कारण मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों या दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था।

अस्पताल की पुरानी लिथोट्रिप्सी मशीन करीब 3.41 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई थी। फरवरी 2021 में तकनीकी खराबी के कारण यह काम करना बंद कर गई थी। मशीन को ठीक करने के कई प्रयास किए गए, लेकिन इसे दोबारा चालू नहीं किया जा सका। इसके चलते लंबे समय तक मरीजों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया। अब नई मशीन आने से अस्पताल में पथरी के इलाज की सुविधा बहाल होने की उम्मीद है।

लिथोट्रिप्सी उपचार में पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ने के लिए विशेष तकनीक का उपयोग किया जाता है। मरीज की स्थिति, पथरी के आकार और उसके स्थान के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि यह प्रक्रिया उपयुक्त है या किसी अन्य उपचार की जरूरत है। उपयुक्त मामलों में इससे पारंपरिक सर्जरी की आवश्यकता कम हो सकती है और मरीज को अस्पताल में कम समय बिताना पड़ सकता है।

अस्पताल के ऑपरेशन थिएटरों में भी आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गई हैं। यहां करीब 33 लाख रुपये की लागत से दो इलेक्ट्रो-हाइड्रोलिक स्वचालित ऑपरेशन थिएटर टेबल लगाई गई हैं। इन टेबलों को दानदाताओं के सहयोग से उपलब्ध कराया गया है। इससे पहले ऑपरेशन थिएटर में मरीजों की स्थिति बदलने के लिए मैनुअल टेबलों का इस्तेमाल किया जाता था, जिन्हें लीवर और हैंडल की मदद से समायोजित करना पड़ता था।

नई स्वचालित टेबलों की मदद से बटन दबाकर मरीज की ऊंचाई और शरीर की स्थिति को जरूरत के अनुसार बदला जा सकता है। इससे ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को सुविधा मिलेगी और विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए मरीज को सही स्थिति में रखना आसान होगा। इनका इस्तेमाल सामान्य सर्जरी, हड्डियों के उपचार, स्त्री रोग, कान-नाक-गला, नेत्र चिकित्सा और अन्य ऑपरेशनों में किया जा सकता है।

इसके अलावा, कैथल सिविल अस्पताल में पहले से सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध है। अब सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल के तहत एमआरआई सेवा शुरू करने की भी योजना है। अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई यानी आईसीयू भी कार्यरत है, जिससे गंभीर मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने की क्षमता मजबूत हुई है।

स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य जिले के मरीजों को अधिक से अधिक चिकित्सा सुविधाएं उनके नजदीक उपलब्ध कराना है। कैंसर डे-केयर सेंटर शुरू होने, लिथोट्रिप्सी सेवा बहाल होने की तैयारी और ऑपरेशन थिएटर के आधुनिकीकरण से कैथल सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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