29 मई 2026 : लुधियाना के पास स्थित जर्खड़ गांव लंबे समय से ग्रामीण खेल संस्कृति और हॉकी परंपरा के लिए जाना जाता है। अब एक वरिष्ठ खेल पत्रकार इस गांव को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के मिशन में जुटे हुए हैं। उनका उद्देश्य जर्खड़ को केवल पंजाब ही नहीं बल्कि वैश्विक खेल मानचित्र पर स्थापित करना है।
जानकारी के अनुसार, इस अनुभवी खेल पत्रकार ने कई दशकों तक खेल पत्रकारिता में काम किया और भारतीय खेलों, विशेषकर हॉकी तथा ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को लगातार मंच देने का प्रयास किया। अब वे अपने अनुभव और नेटवर्क का उपयोग जर्खड़ गांव की पहचान बढ़ाने में कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जर्खड़ गांव वर्षों से ग्रामीण हॉकी प्रतियोगिताओं और खेल आयोजनों के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहां आयोजित टूर्नामेंटों में देश-विदेश के खिलाड़ी और दर्शक भाग लेते रहे हैं।
हॉकी से जुड़े जानकारों का कहना है कि पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों ने भारतीय हॉकी को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं और जर्खड़ उनमें महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
रिपोर्टों के अनुसार, गांव में खेल संस्कृति को मजबूत करने के लिए स्थानीय स्तर पर खेल मैदान, प्रतियोगिताएं और युवा प्रशिक्षण गतिविधियां चलाई जाती रही हैं।
खेल विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को अवसर मिलने पर वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं।
खेल प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, किसी क्षेत्र को खेल केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए केवल प्रतिभा ही नहीं बल्कि बुनियादी ढांचा, प्रचार और निरंतर आयोजन भी जरूरी होते हैं।
बताया जा रहा है कि वरिष्ठ खेल पत्रकार गांव की ऐतिहासिक खेल विरासत को दस्तावेज़ी रूप देने और उसे व्यापक स्तर पर प्रचारित करने में भी लगे हुए हैं।
लुधियाना और आसपास के क्षेत्रों में खेलों को लेकर युवाओं के बीच काफी उत्साह देखा जाता है, खासकर हॉकी और कबड्डी जैसे खेलों में।
विशेषज्ञों का कहना है कि मीडिया और खेल पत्रकारिता ग्रामीण प्रतिभाओं को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पत्रकारिता से जुड़े जानकारों के अनुसार, सकारात्मक खेल कहानियां युवाओं को प्रेरित करने और खेल संस्कृति को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम होती हैं।
सूत्रों के अनुसार, गांव में भविष्य में बड़े खेल आयोजनों और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं को आकर्षित करने की भी योजना बनाई जा रही है।
भारत में कई छोटे गांव और कस्बे खेल प्रतिभाओं के बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान नहीं मिल पाती।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खेल ढांचे और प्रचार पर लगातार काम किया जाए तो जर्खड़ गांव भी अंतरराष्ट्रीय खेल पर्यटन और ग्रामीण खेल विकास का उदाहरण बन सकता है।
फिलहाल, गांव के लोग और खेल प्रेमी इस पहल को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं और इसे पंजाब की खेल विरासत को आगे बढ़ाने वाला कदम मान रहे हैं।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि खेल, पत्रकारिता और सामुदायिक प्रयास मिलकर किसी छोटे क्षेत्र को भी वैश्विक पहचान दिला सकते हैं।
