10 सितंबर 2026: नेत्रदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जालंधर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में 41वां राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा मनाया गया। यह अभियान 25 अगस्त से 8 सितंबर तक चलाया गया, जिसके तहत विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता सेमिनार, नेत्रदान शिविर और आंखों की जांच से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नेत्रदान के माध्यम से दृष्टिबाधित लोगों को दोबारा देखने की क्षमता हासिल करने में मदद मिल सकती है। अभियान के दौरान लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में जानकारी दी गई और उन्हें मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया गया।
सिविल सर्जन ने आई मोबाइल यूनिट का किया निरीक्षण
जालंधर के सिविल सर्जन और नेत्र विशेषज्ञ डॉ. राजेश गर्ग ने सिविल अस्पताल स्थित आई मोबाइल यूनिट का दौरा किया और इसके कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने नेत्रदान से जुड़ी गतिविधियों और लोगों तक पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी ली।
डॉ. गर्ग ने कहा कि भारत में लाखों लोग दृष्टिबाधित हैं और इनमें से कई लोगों को दान किए गए कॉर्निया से लाभ मिल सकता है। हालांकि, देश में नेत्रदान करने वालों की संख्या अभी भी कम है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जीवनकाल में नेत्रदान का संकल्प लें ताकि मृत्यु के बाद उनकी आंखें जरूरतमंद लोगों की रोशनी लौटाने में मदद कर सकें।
हर छह महीने में आंखों की जांच की सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को नियमित रूप से आंखों की जांच कराने की भी सलाह दी। डॉ. राजेश गर्ग ने लोगों से कहा कि आंखों की सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और कम से कम हर छह महीने में आंखों की जांच करानी चाहिए।
उन्होंने जिले के लोगों से नेत्रदान अभियान को आगे बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और दोस्तों को भी नेत्रदान के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
पंजाब के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त कॉर्नियल ट्रांसप्लांट
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पंजाब के सरकारी अस्पतालों में पात्र मरीजों के लिए मुफ्त कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया ऐसे मरीजों के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिन्हें दृष्टि संबंधी गंभीर समस्या है।
नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को इस मानवीय कार्य से जोड़ना है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि ज्यादा लोग मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का संकल्प लें तो जरूरतमंद मरीजों को इसका लाभ मिल सकता है।
मृत्यु के बाद ही होता है आंखों का दान
आई मोबाइल यूनिट की एसएमओ डॉ. गुरप्रीत कौर ने लोगों को नेत्रदान की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि व्यक्ति अपने जीवनकाल में नेत्रदान करने की इच्छा या संकल्प दर्ज करा सकता है, लेकिन आंखों का वास्तविक दान मृत्यु के बाद ही किया जाता है।
उन्होंने बताया कि मृत्यु के बाद आंखों का दान आदर्श रूप से चार से छह घंटे के भीतर किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि उम्रदराज व्यक्ति, चश्मा पहनने वाले लोग, आंखों की सर्जरी करा चुके व्यक्ति और कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करने वाले लोग भी सामान्य तौर पर नेत्रदान कर सकते हैं।
हालांकि, कुछ गंभीर बीमारियों की स्थिति में नेत्रदान संभव नहीं होता। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एड्स, पीलिया, ब्लड कैंसर और कुछ प्रकार के मस्तिष्क संक्रमण से पीड़ित लोगों के मामले में सामान्य तौर पर आंखें दान करने की पात्रता नहीं होती।
स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित किए गए जागरूकता कार्यक्रम
जिला शिक्षा एवं सूचना अधिकारी गुरदीप सिंह ने बताया कि नेत्रदान पखवाड़े के दौरान जिले के अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता सेमिनार आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में लोगों को नेत्रदान की जरूरत, इसकी प्रक्रिया और इससे दृष्टिबाधित लोगों को होने वाले लाभ के बारे में जानकारी दी गई।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की कि वे केवल स्वयं नेत्रदान का संकल्प न लें, बल्कि अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी इसके लिए जागरूक करें। इस तरह नेत्रदान को लेकर समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा दिया जा सकता है।
नेत्रदान से किसी की जिंदगी में लौट सकती है रोशनी
नेत्रदान को स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक और मानवीय पहल बताया है। मृत्यु के बाद दान की गई आंखों से प्राप्त कॉर्निया जरूरतमंद मरीजों के उपचार में इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में एक व्यक्ति का नेत्रदान किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में रोशनी लौटाने का माध्यम बन सकता है।
जालंधर स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया गया यह अभियान इसी संदेश को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास है। विभाग ने जिले के निवासियों से नेत्रदान के महत्व को समझने और परिवार के सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की है।
