14 अक्टूबर 2026: पंजाब के जालंधर जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण आहार की आपूर्ति का संकट पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर की ओर से 15 सितंबर को एक सप्ताह के भीतर राशन की आपूर्ति बहाल करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन इसके लगभग एक महीने बाद भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भोजन तैयार करने के लिए नियमित सामग्री और भुगतान मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं तक पोषण आहार पहुंचाने की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
करीब पांच महीने से आपूर्ति में परेशानी
रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के आंगनवाड़ी केंद्रों में खाद्य सामग्री की आपूर्ति में रुकावट करीब पांच महीने पहले शुरू हुई थी। पहले मार्कफेड के माध्यम से दलिया, खिचड़ी और अन्य पहले से तैयार खाद्य सामग्री की आपूर्ति की जाती थी। हालांकि, गुणवत्ता संबंधी शिकायतों के बाद अप्रैल में इस व्यवस्था को रोक दिया गया।
इसके बाद सरकार ने केंद्रों में स्थानीय स्तर पर ताजा भोजन तैयार कराने की व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया। इसके तहत गेहूं और चावल उपलब्ध कराने तथा भोजन तैयार करने के लिए जरूरी अन्य सामग्री खरीदने के लिए राशि देने की योजना बनाई गई। लेकिन इस बदलाव के बाद राशन और भुगतान की प्रक्रिया में देरी होने से कई केंद्रों पर नियमित भोजन तैयार करने में मुश्किलें बनी रहीं।
बच्चों को बिस्कुट और टिफिन पर निर्भर रहना पड़ा
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के अनुसार, राशन की कमी के कारण कुछ केंद्रों पर बच्चों को पौष्टिक भोजन के बजाय बिस्कुट, टॉफियां और नमकीन जैसी पैक्ड चीजें दी गईं। कुछ कार्यकर्ताओं ने अपनी जेब से पैसे खर्च करके बच्चों के लिए खाने का इंतजाम किया, जबकि कुछ केंद्रों पर बच्चों को घर से टिफिन लाने के लिए कहा गया।
जालंधर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि नियमित राशन नहीं मिलने से बच्चों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन देना मुश्किल हो गया था। कार्यकर्ताओं को यह चिंता भी रही कि अगर केंद्रों पर बच्चों को भोजन नहीं मिलेगा तो अभिभावक उन्हें भेजना बंद कर सकते हैं।
1,634 आंगनवाड़ी केंद्र प्रभावित होने की बात
सितंबर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जालंधर जिले के 11 ब्लॉकों में स्थित 1,634 आंगनवाड़ी केंद्रों में राशन की नियमित आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इस समस्या का असर केवल तीन से छह वर्ष के बच्चों को दिए जाने वाले गर्म भोजन पर ही नहीं, बल्कि घर ले जाने वाले राशन पर भी पड़ा।
छह महीने से तीन वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को निर्धारित व्यवस्था के तहत टेक-होम राशन दिया जाना है। लेकिन आपूर्ति में रुकावट के कारण इन लाभार्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मंत्री ने एक सप्ताह में आपूर्ति का दिया था भरोसा
15 सितंबर को सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा था कि सरकार राशन संकट दूर करने के लिए कदम उठा रही है और आवश्यक सामग्री एक सप्ताह के भीतर केंद्रों तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने बताया था कि पुरानी व्यवस्था में बदलाव के बाद केंद्रों पर स्थानीय स्तर पर भोजन तैयार कराने की योजना बनाई गई है।
मंत्री के अनुसार, टेक-होम राशन की आपूर्ति के लिए जिला स्तर पर निविदाएं आवंटित की गई थीं और संबंधित संस्थाओं को खाद्य सामग्री की आपूर्ति के आदेश दिए गए थे। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि कुछ मामलों में संबंधित संस्थाओं की ओर से डिलीवरी में देरी हुई।
गेहूं और चावल पहुंचे, लेकिन भुगतान की प्रक्रिया जारी
14 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, जालंधर, लुधियाना और पटियाला के आंगनवाड़ी केंद्रों तक गेहूं और चावल की आपूर्ति पहुंचने की जानकारी दी गई। इसके साथ ही भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और खाना पकाने की लागत से संबंधित बिलों का भुगतान प्रक्रिया में था।
मंत्री ने कहा कि भुगतान की प्रक्रिया पहली बार लागू की जा रही व्यवस्था से जुड़ी है। वहीं, टेक-होम राशन की आपूर्ति के लिए जिला स्तर पर काम कर रही गैर-सरकारी संस्थाओं की ओर से डिलीवरी में देरी की बात सामने आई। ऐसे में अनाज पहुंचने के बावजूद यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सभी केंद्रों को नियमित रूप से आवश्यक सामग्री और भुगतान मिले।
बच्चों और माताओं के पोषण पर असर की चिंता
आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, शुरुआती देखभाल और महिलाओं को जरूरी सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, तीन से छह वर्ष के बच्चों को केंद्रों पर गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है, जबकि छोटे बच्चों और गर्भवती तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं को घर ले जाने के लिए राशन उपलब्ध कराया जाता है।
ऐसे में लंबे समय तक भोजन की आपूर्ति बाधित रहना लाभार्थियों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। नियमित और संतुलित भोजन उपलब्ध कराना इसलिए जरूरी है, ताकि पोषण संबंधी योजनाओं का लाभ उन परिवारों तक पहुंच सके जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
अब नियमित आपूर्ति बहाल होने पर नजर
मंत्री के आश्वासन और अनाज की आपूर्ति शुरू होने के बाद अब मुख्य सवाल यह है कि आंगनवाड़ी केंद्रों पर नियमित भोजन कब तक पूरी तरह बहाल होगा। कार्यकर्ताओं को समय पर राशन, दूध, दाल, चीनी, तेल और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ भुगतान की प्रक्रिया भी सुचारू बनानी होगी।
