15 जून 2026 : Majha क्षेत्र में उगाई जाने वाली हल्दी अब केवल एक मसाला नहीं रही, बल्कि स्थानीय किसानों और उद्यमियों के लिए आय और पहचान का नया स्रोत बन गई है। ‘माझा हल्दी’ ने खेती, प्रसंस्करण और विपणन को जोड़ते हुए एक सफल ग्रामीण उद्यम का रूप ले लिया है।
शुरुआत में सीमित स्तर पर की गई हल्दी की खेती धीरे-धीरे एक संगठित पहल में बदल गई। किसानों ने पारंपरिक फसलों के साथ हल्दी की खेती को अपनाया और बेहतर उत्पादन तकनीकों का उपयोग किया। इसके बाद स्थानीय स्तर पर इसकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग शुरू हुई।
माझा हल्दी की पहचान उसकी गुणवत्ता, रंग और स्थानीय उत्पादन मॉडल के कारण बढ़ी। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने लगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) और ब्रांडिंग के जरिए कृषि उत्पादों को नई बाजार पहचान दी जा सकती है। माझा हल्दी इसका एक उदाहरण बनकर उभरी है, जहां खेती को सीधे उद्यमिता से जोड़ा गया।
Punjab में इस तरह की पहलें किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में विविधता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। स्थानीय स्तर पर विकसित ब्रांड अब व्यापक बाजारों तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
