10 जुलाई 2026 : पंजाब के कपूरथला नगर निगम चुनाव में बहुमत हासिल करने के बावजूद कांग्रेस सत्ता पर कब्जा बरकरार नहीं रख सकी। चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसके पास नगर निगम में स्पष्ट बहुमत था। हालांकि, मेयर चुनाव से पहले बदले राजनीतिक समीकरणों ने पूरी तस्वीर बदल दी और आम आदमी पार्टी (AAP) ने नगर निगम की सत्ता अपने नाम कर ली।
चुनाव में कांग्रेस ने सर्वाधिक वार्डों में जीत दर्ज की थी, जिससे यह माना जा रहा था कि मेयर पद भी आसानी से उसके खाते में जाएगा। लेकिन मेयर चुनाव से पहले कई पार्षदों के समर्थन में बदलाव की खबरें सामने आईं, जिससे कांग्रेस का बहुमत कमजोर पड़ गया।
राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान AAP ने अन्य पार्षदों का समर्थन हासिल कर लिया। इसके बाद मेयर चुनाव में पार्टी को पर्याप्त मत मिले और उसने कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए नगर निगम की कमान संभाल ली। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी।
कांग्रेस ने पूरे मामले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जनादेश का सम्मान नहीं किया गया और राजनीतिक दबाव के जरिए पार्षदों का समर्थन बदला गया। पार्टी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसे निर्वाचित पार्षदों का लोकतांत्रिक समर्थन प्राप्त हुआ। पार्टी का कहना है कि मेयर का चुनाव पूरी तरह नियमों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कपूरथला की यह घटना स्थानीय राजनीति में बदलते समीकरणों और दल-बदल की राजनीति का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। इस घटनाक्रम का असर भविष्य की नगर निकाय राजनीति और दलों की रणनीति पर भी देखने को मिल सकता है।
