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एशियन गेम्स में गोल्ड दिलाने वाला वो बचाव, हरियाणा की सविता ने सुनाया पूरा किस्सा

7 अक्टूबर 2026  भारतीय महिला हॉकी टीम ने 2026 एशियन गेम्स में चीन को 1-0 से हराकर 44 साल बाद महिला हॉकी में एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल जीता। इस ऐतिहासिक जीत में हरियाणा की स्टार गोलकीपर सविता पूनिया का योगदान बेहद अहम रहा। फाइनल मुकाबले में चीन को मिले पेनल्टी स्ट्रोक को सविता ने शानदार अंदाज में बचाकर भारत की बढ़त को कायम रखा। इस सेव को मैच के निर्णायक पलों में गिना जा रहा है।

चीन के खिलाफ फाइनल में सविता का शानदार सेव

भारत और चीन के बीच खेले गए महिला हॉकी फाइनल में भारत ने शुरुआत से ही मजबूत प्रदर्शन किया। लालरेमसियामी ने 10वें मिनट में गोल कर भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके बाद चीन ने लगातार भारतीय गोलपोस्ट पर दबाव बनाया और बराबरी का मौका तलाशा।

मुकाबले के दूसरे क्वार्टर में चीन को पेनल्टी स्ट्रोक मिला। उस समय भारतीय टीम के सामने बढ़त गंवाने का बड़ा खतरा था। लेकिन गोलकीपर सविता पूनिया ने शानदार प्रतिक्रिया देते हुए गेंद को रोक दिया और भारत की 1-0 की बढ़त बरकरार रखी।

रेफरल के बाद सविता को मिले कुछ सेकंड

सविता ने हिसार में बातचीत के दौरान उस निर्णायक पल को याद किया। उन्होंने बताया कि भारत की ओर से लिए गए रेफरल के कारण उन्हें पेनल्टी स्ट्रोक से पहले तैयारी के लिए कुछ कीमती सेकंड मिल गए थे।

सविता ने बताया कि उन्होंने उस समय गहरी सांस ली और अपने प्रशिक्षण को याद किया। उन्होंने कहा कि अगर वह अभ्यास के दौरान अपने नीदरलैंड्स के कोच से पेनल्टी स्ट्रोक रोक सकती हैं, तो चीन की खिलाड़ी के शॉट को भी रोक सकती हैं।

इसके बाद उन्होंने शॉट का इंतजार किया और गेंद आते ही बाईं ओर छलांग लगाकर उसे रोक दिया। गेंद उनके हाथ की हथेली से टकराई और भारत की बढ़त कायम रही।

सविता बोलीं- मुझे भरोसा था कि मैं रोक दूंगी

सविता ने बताया कि उस पल उन्हें पता था कि पूरा नतीजा कुछ ही सेकंड में तय होने वाला है। उन्होंने अपनी रणनीति पर ध्यान केंद्रित किया और कहा कि उन्हें भरोसा था कि वह पेनल्टी स्ट्रोक को रोक लेंगी।

उनका यह आत्मविश्वास मैदान पर भी दिखाई दिया। शानदार सेव के बाद भारतीय टीम ने अपनी रक्षात्मक मजबूती बनाए रखी और चीन को बराबरी का गोल करने का मौका नहीं दिया।

44 साल बाद भारत ने जीता महिला हॉकी गोल्ड

भारत ने चीन को 1-0 से हराकर महिला हॉकी में एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल 44 साल बाद अपने नाम किया। इससे पहले भारतीय महिला टीम ने 1982 में यह खिताब जीता था।

इस जीत के साथ भारतीय टीम ने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधी क्वालिफिकेशन भी हासिल कर ली। ऐतिहासिक जीत में लालरेमसियामी का गोल और सविता का पेनल्टी स्ट्रोक सेव सबसे अहम पलों में रहे।

पेरिस ओलंपिक में जगह नहीं मिलने का था दर्द

सविता ने बताया कि पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाना टीम के लिए बड़ा झटका था। इसी निराशा ने एशियन गेम्स में वापसी करने और गोल्ड मेडल जीतने के लिए टीम को अतिरिक्त प्रेरणा दी।

उन्होंने बताया कि वर्ल्ड कप में पांचवें स्थान पर रहने के बाद टीम ने एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने और अगले ओलंपिक में सीधे प्रवेश हासिल करने का लक्ष्य बनाया था।

मां की इच्छा भी हुई पूरी

सविता ने कहा कि एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल उनकी मां लीलावती की उस इच्छा को भी पूरा करता है, जिसमें वह अपनी बेटी को इस मेडल के साथ देखना चाहती थीं।

सविता के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि उनके करियर में कई मुश्किल दौर आए। उन्होंने बताया कि 2011 में एक घटना के बाद उन्होंने हॉकी छोड़ने तक का मन बना लिया था। हालांकि, उनके पिता महेंद्र सिंह पूनिया ने उनका हौसला बढ़ाया और खेल जारी रखने के लिए उनका साथ दिया।

हिसार में हुआ सम्मान

एशियन गेम्स की ऐतिहासिक जीत के बाद सविता पूनिया और भारतीय टीम की खिलाड़ी दीपिका सहरावत का हिसार में सम्मान किया गया। दोनों को उनके कोच प्रोफेसर आजाद सिंह मलिक ने सम्मानित किया।

दीपिका सहरावत ने भी फाइनल में सविता के प्रदर्शन को टीम के लिए निर्णायक पल बताया। उनके अनुसार, गोलकीपर का वह सेव भारतीय टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण था।

कुल मिलाकर, चीन के खिलाफ एशियन गेम्स फाइनल में सविता पूनिया का पेनल्टी स्ट्रोक सेव भारतीय महिला हॉकी टीम की ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीत का सबसे अहम पल बन गया। हरियाणा की इस अनुभवी गोलकीपर ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन कर भारत की बढ़त को कायम रखा और टीम को 44 साल बाद एशियन गेम्स महिला हॉकी का गोल्ड जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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