24 मई 2026 : यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए हरियाणा सरकार ने कई स्तरों पर व्यापक कार्ययोजना लागू की है। नदी में बढ़ते प्रदूषण का मुख्य कारण शहरी सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और नालों के जरिए सीधे बहाया जाने वाला गंदा पानी माना जाता है। इस समस्या को खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, निगरानी और सख्त कार्रवाई पर फोकस किया है।
सरकार का सबसे बड़ा कदम सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाना है। हरियाणा में दर्जनों शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता बढ़ाई जा रही है ताकि घरेलू गंदे पानी को नदी में जाने से पहले साफ किया जा सके। कई पुराने प्लांट्स को अपग्रेड किया जा रहा है और नए प्लांट्स भी स्थापित किए जा रहे हैं।
इसके साथ ही औद्योगिक प्रदूषण को रोकने के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) पर जोर दिया जा रहा है। खासकर गुरुग्राम, फरीदाबाद और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में चल रही डाइंग, केमिकल और टेक्सटाइल यूनिट्स पर निगरानी बढ़ाई गई है। बिना ट्रीटमेंट के पानी छोड़ने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
हरियाणा सरकार ने टेक्नोलॉजी का भी सहारा लिया है। नालों और ड्रेनेज सिस्टम की ड्रोन और GIS मैपिंग की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन जगहों से सबसे ज्यादा प्रदूषित पानी यमुना में जा रहा है। इससे टारगेटेड एक्शन लेने में मदद मिल रही है।
सरकार ने 2027 तक “जीरो अनट्रीटेड डिस्चार्ज” का लक्ष्य रखा है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में किसी भी प्रकार का बिना साफ किया हुआ सीवेज या औद्योगिक पानी यमुना में नहीं जाएगा। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्थानीय निकायों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सख्त निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली और उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर भी संयुक्त स्तर पर काम किया जा रहा है क्योंकि यमुना कई राज्यों से होकर गुजरती है। अंतर-राज्यीय समन्वय के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि एक राज्य की सफाई दूसरे राज्य में जाकर बेअसर न हो।
इसके अलावा नदी किनारे ठोस कचरे के प्रबंधन और अतिक्रमण हटाने पर भी काम चल रहा है। कई जगहों पर सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं और नदी के फ्लडप्लेन को सुरक्षित करने की कोशिश की जा रही है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार निगरानी कर रहा है और नियम तोड़ने वाली यूनिट्स पर जुर्माना और बंदी की कार्रवाई भी की जा रही है। सरकार का दावा है कि अगर योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं तो आने वाले वर्षों में यमुना की स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
