14 अक्टूबर 2026: भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व स्टार खिलाड़ी और टोक्यो ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकीं गुरजीत कौर एक बार फिर राष्ट्रीय टीम में वापसी करने की तैयारी कर रही हैं। पंजाब के अमृतसर जिले के मियादी कलां गांव से ताल्लुक रखने वाली गुरजीत कौर ने कहा है कि वह लगातार मेहनत कर रही हैं और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही भारतीय टीम का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और खेलों में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए हॉस्टल की जरूरत पर भी जोर दिया है।
गुरजीत कौर भारतीय हॉकी की जानी-मानी ड्रैग-फ्लिकर हैं। वह टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा थीं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ओलंपिक सेमीफाइनल में उनके अहम गोल ने भारत को 1-0 से जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस जीत के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंची थी। गुरजीत के प्रदर्शन ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई और पंजाब की युवा खिलाड़ियों के लिए भी वह प्रेरणा बनीं।
द ट्रिब्यून की 14 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, गुरजीत कौर ने राष्ट्रीय टीम में वापसी को लेकर कहा कि वह इसके लिए प्रयास कर रही हैं और उन्हें जल्द टीम में जगह मिलने की उम्मीद है। वह फिलहाल घरेलू स्तर पर नॉर्दर्न रेलवे की टीम के लिए हॉकी खेल रही हैं। इससे पहले भी वह राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं और प्रो लीग 2023 तथा हॉकी इंडिया लीग 2025 में अपने प्रदर्शन के लिए चर्चा में रही थीं।
गुरजीत कौर ने महिला खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित और बेहतर खेल सुविधाओं की जरूरत पर भी बात की। उनका मानना है कि महिला खिलाड़ियों के लिए हॉस्टल बनाए जाने चाहिए, ताकि वे अपने घरों से दूर रहकर भी सुरक्षित माहौल में प्रशिक्षण ले सकें। कई बार ग्रामीण इलाकों की प्रतिभाशाली लड़कियों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में रहने की उचित व्यवस्था होने से उनके लिए नियमित अभ्यास करना और खेल में अपना करियर बनाना आसान हो सकता है। महिला हॉस्टल युवा खिलाड़ियों और उनके परिवारों का भरोसा बढ़ाने में भी मददगार हो सकते हैं।
गुरजीत ने पंजाब में खेल सुविधाओं के विकास और युवाओं को मिल रहे अवसरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ‘खेड़ां वतन पंजाब दियां’ जैसे खेल आयोजन उभरती प्रतिभाओं को आगे आने का मंच दे सकते हैं। ऐसे आयोजनों से गांवों और छोटे शहरों में रहने वाले खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलता है। उन्होंने तरनतारन जिले के काका कंडियाला गांव की बलजीत कौर का भी उल्लेख किया, जिन्होंने अपने प्रदर्शन से पंजाब का नाम रोशन किया है।
गुरजीत कौर का सफर छोटे गांव से अंतरराष्ट्रीय हॉकी तक पहुंचने की मिसाल है। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में कई चुनौतियों का सामना किया। रिपोर्ट के अनुसार, वह अपनी बहन प्रदीप कौर के साथ स्कूल जाने के लिए रोजाना करीब 13 किलोमीटर की यात्रा करती थीं। उनकी बहन भी पूर्व हॉकी खिलाड़ी हैं और अब कोच के रूप में काम कर रही हैं। गुरजीत ने वर्ष 2014 में भारत के लिए खेलना शुरू किया और आगे चलकर ओलंपिक स्तर तक पहुंचीं।
गुरजीत कौर की राष्ट्रीय टीम में वापसी की कोशिशों के साथ महिला खिलाड़ियों के लिए हॉस्टल बनाने की मांग भी महत्वपूर्ण है। सुरक्षित आवास, नियमित प्रशिक्षण और खेल सुविधाएं मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों को अपनी प्रतिभा निखारने में मदद मिल सकती है। अब देखना होगा कि गुरजीत कौर की मेहनत उन्हें दोबारा भारतीय राष्ट्रीय टीम तक पहुंचाती है या नहीं।
