14 मई 2026 : विश्व डॉल दिवस से पहले पारंपरिक पंजाबी कला और संस्कृति से जुड़ी ‘गुड्डियां पटोले’ को पुनर्जीवित करने के लिए नया मंच उपलब्ध कराया गया है।
जानकारी के अनुसार इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लोक कला और पारंपरिक खिलौनों को बढ़ावा देने से सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है और स्थानीय कलाकारों को भी नया अवसर मिलता है।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न पारंपरिक गुड़ियों और हस्तनिर्मित कलाकृतियों को प्रदर्शित किए जाने की संभावना जताई गई है।
संस्कृति से जुड़े लोगों का कहना है कि आधुनिक दौर में पारंपरिक कला रूपों को संरक्षित करना बेहद जरूरी हो गया है।
इस पहल से महिला कलाकारों और हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों को आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
सांस्कृतिक संगठनों ने लोगों से स्थानीय कला और पारंपरिक शिल्प को समर्थन देने की अपील की है।
कुल मिलाकर विश्व डॉल दिवस से पहले ‘गुड्डियां पटोले’ को मिला नया मंच पंजाबी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
