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आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए तीन दिनों में जारी होंगी नई गाइडलाइंस: स्थानीय निकाय सचिव

24 मई 2026 : पंजाब में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर राज्य सरकार अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। स्थानीय निकाय विभाग के सचिव ने कहा है कि आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अगले तीन दिनों के भीतर नई गाइडलाइंस जारी की जाएंगी। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य शहरों और कस्बों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण पाना है।

पिछले कुछ महीनों में पंजाब के कई शहरों से आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आई हैं। बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर कुत्तों के हमलों के मामलों में वृद्धि ने प्रशासन और स्थानीय निकायों की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किए और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

स्थानीय निकाय सचिव ने अधिकारियों के साथ बैठक के बाद कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। नई गाइडलाइंस में नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों की जिम्मेदारियां स्पष्ट की जाएंगी। इसके तहत आवारा कुत्तों की पहचान, नसबंदी, टीकाकरण और पुनर्वास से जुड़े नियमों को और प्रभावी बनाया जाएगा।

सरकार की योजना है कि सभी शहरी निकायों में विशेष टीमें बनाई जाएं जो नियमित रूप से आवारा कुत्तों की निगरानी करेंगी। इन टीमों को पशु चिकित्सकों और विशेषज्ञों का सहयोग भी मिलेगा। इसके अलावा, डॉग बाइट के मामलों की रिपोर्टिंग और त्वरित कार्रवाई के लिए हेल्पलाइन व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार नई गाइडलाइंस में पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रम को तेजी से लागू करने पर विशेष जोर रहेगा। इसके तहत आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन अभियान बड़े स्तर पर चलाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि केवल पकड़ने या हटाने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है, इसलिए वैज्ञानिक और मानवीय तरीकों को अपनाना जरूरी है।

राज्य सरकार स्थानीय निकायों को इस कार्य के लिए अतिरिक्त संसाधन और फंड भी उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है। कई नगर निकायों ने पहले ही कर्मचारियों और उपकरणों की कमी की शिकायत की है। नई नीति के तहत डॉग शेल्टर और एनिमल केयर सेंटर स्थापित करने की योजना भी शामिल हो सकती है।

पंजाब के कई शहरों में नागरिकों ने सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों के कारण भय का माहौल होने की शिकायत की है। सुबह-शाम सैर करने वाले लोगों, स्कूल जाने वाले बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पतालों में डॉग बाइट के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

पशु अधिकार संगठनों ने भी सरकार से संतुलित नीति अपनाने की अपील की है। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों के साथ क्रूरता नहीं होनी चाहिए और समस्या का समाधान मानवीय तरीके से किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि नसबंदी और टीकाकरण ही इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान है।

स्थानीय निकाय विभाग ने सभी शहरी निकायों से अपने-अपने क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या का डेटा तैयार करने को कहा है। इसके आधार पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों का पालन न करने वाले निकायों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार की ओर से जारी होने वाली नई गाइडलाइंस को लेकर लोगों में काफी उम्मीदें हैं। नागरिकों का मानना है कि यदि योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया तो आवारा कुत्तों की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन निर्देशों को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाता है।

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