30 सितंबर 2026 उत्तर प्रदेश के महराजगंज में करीब दो साल पहले हुई फैजुल्लाह की संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज करते हुए रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर घटना का रिक्रिएशन कराया। फॉरेंसिक टीम ने मौके पर मानव आकार की डमी रखकर यह समझने की कोशिश की कि फैजुल्लाह के शरीर पर आई गंभीर चोटें किन परिस्थितियों में संभव हो सकती हैं।
रेलवे ट्रैक पर डमी रखकर जांच
पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने रेलवे ट्रैक के आसपास उस स्थिति को दोबारा समझने की कोशिश की, जिसमें फैजुल्लाह गंभीर हालत में मिले थे। इसके लिए मानव आकार की डमी का इस्तेमाल किया गया। डमी को अलग-अलग परिस्थितियों में रखकर चोटों की संभावित स्थिति का अध्ययन किया गया।
इस रिक्रिएशन का उद्देश्य घटना से जुड़े उन सवालों को समझना था, जिनका जवाब अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल की परिस्थितियों को दोबारा परखने की कोशिश की।
11 अक्टूबर 2024 को रेलवे ट्रैक के पास मिले थे फैजुल्लाह
रिपोर्ट के मुताबिक, महराजगंज के घुघली क्षेत्र के पौहरिया गांव के रहने वाले फैजुल्लाह 11 अक्टूबर 2024 को रेलवे ट्रैक के किनारे गंभीर हालत में मिले थे। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान 13 अक्टूबर को मेडिकल कॉलेज में उनकी मौत हो गई।
फैजुल्लाह की मौत के बाद परिवार की ओर से मामले को लेकर सवाल उठाए गए। परिजनों ने गांव के चार लोगों पर हत्या का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। हालांकि पुलिस की जांच के बाद मौत को रेलवे हादसा बताते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी।
परिवार ने उठाए थे सवाल
पुलिस की ओर से मामले को रेल हादसा बताए जाने के बाद फैजुल्लाह के परिजनों ने इस निष्कर्ष पर आपत्ति जताई। इसके बाद मामले को स्टेट मेडिकोलीगल सेल, लखनऊ भेजा गया।
स्टेट मेडिकोलीगल सेल की रिपोर्ट में चोटों को ‘रन ओवर इंजरी’ बताया गया था। इसके बावजूद परिवार की ओर से मामले की जांच को लेकर सवाल उठते रहे और अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय का रुख किया।
सीजेएम के आदेश के बाद भी जांच में देरी
मामले में जांच की धीमी गति को लेकर भी सवाल उठे। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट यानी CJM ने 30 मार्च 2026 को विवेचक को दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया था।
निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी नहीं होने पर परिजनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान जांच में देरी का मामला सामने आया, जिसके बाद जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया गया।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बढ़ी जांच की रफ्तार
हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई और जांच में देरी को लेकर उठे सवालों के बीच पुलिस ने दोबारा घटनास्थल की जांच की। इसी क्रम में फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया और घटना का रिक्रिएशन कराया गया।
करीब दो साल पुराने मामले में इस तरह दोबारा जांच शुरू होने से अब पुलिस के सामने घटनाक्रम और मौत की परिस्थितियों को लेकर उपलब्ध साक्ष्यों को नए सिरे से देखने की चुनौती है।
आखिर कौन थे फैजुल्लाह?
फैजुल्लाह महराजगंज के घुघली क्षेत्र के पौहरिया गांव के रहने वाले थे। अक्टूबर 2024 में रेलवे ट्रैक के किनारे गंभीर हालत में मिलने के बाद उनकी मौत हो गई थी। उनकी मौत को लेकर परिवार ने हत्या की आशंका जताई थी, जबकि पुलिस ने अपनी जांच के बाद इसे रेल हादसा बताया था।
यही अंतर मामले को लेकर विवाद का प्रमुख हिस्सा बना रहा। परिवार की ओर से जांच पर आपत्ति और न्यायालय का रुख करने के बाद अब पुलिस ने घटनास्थल पर रिक्रिएशन के जरिए मामले की परिस्थितियों को दोबारा समझने की कोशिश की है।
अब आगे क्या होगा?
रेलवे ट्रैक पर कराए गए रिक्रिएशन और फॉरेंसिक जांच के बाद पुलिस को मामले में आगे की कार्रवाई के लिए उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण करना होगा। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि रिक्रिएशन से मौत की परिस्थितियों को लेकर अंतिम निष्कर्ष क्या निकलेगा।
मामला न्यायालय की निगरानी में भी रहा है और जांच में देरी को लेकर पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। ऐसे में आगे की जांच और अदालत के समक्ष पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर इस मामले की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।
