22 जून 2026 : पंजाब के अमृतसर में एक पूर्व सैनिक ने सेना की सेवा के बाद खेती और उद्यमिता के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। युद्ध के मैदान से लौटकर उन्होंने रसायन-मुक्त खाद्य उत्पादों के उत्पादन और विपणन का कार्य शुरू किया, जो अब कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।
पूर्व सैनिक का उद्देश्य लोगों तक सुरक्षित, पौष्टिक और रसायन-मुक्त खाद्य पदार्थ पहुंचाना है। इसके लिए उन्होंने जैविक और प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों को अपनाते हुए एक विशेष खाद्य उद्यम की स्थापना की। इस पहल के माध्यम से किसानों को भी टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सेना में सेवा के दौरान अनुशासन, समर्पण और कठिन परिस्थितियों में काम करने का जो अनुभव मिला, वही आज कृषि और व्यवसाय के क्षेत्र में उनकी सफलता का आधार बना है। उनका मानना है कि स्वस्थ समाज के निर्माण में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इस उद्यम के तहत बिना रासायनिक उर्वरकों और हानिकारक कीटनाशकों के उगाई गई फसलों से विभिन्न खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं के बीच बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के कारण ऐसे उत्पादों की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और किसानों की दीर्घकालिक आय बढ़ाने में भी सहायक हो सकती है। ऐसे प्रयास कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव का संकेत माने जा रहे हैं।
पूर्व सैनिक की यह पहल कई युवाओं और किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मूल्यवर्धित कृषि और उद्यमिता की ओर प्रेरित कर रही है। उनका मानना है कि यदि किसानों को सही प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध हो, तो रसायन-मुक्त खेती भविष्य में एक मजबूत विकल्प बन सकती है।
