19 मई 2026 : पंजाब में कारोबारी और राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) द्वारा 15 हजार मोबाइल फोन की खरीद प्रक्रिया की जांच कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियां इस खरीद प्रक्रिया में कथित वित्तीय अनियमितताओं, निविदा प्रक्रिया और लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं। मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, PSPCL द्वारा बड़ी संख्या में मोबाइल फोन खरीदने के फैसले और उससे जुड़े ठेकों की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए थे। अब ED कथित रूप से दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित कंपनियों की भूमिका की जांच कर रहा है।
प्रवर्तन निदेशालय अधिकारियों द्वारा वित्तीय लेनदेन, अनुबंध और खरीद प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं नियमों का उल्लंघन या वित्तीय गड़बड़ी तो नहीं हुई।
संजीव अरोड़ा का नाम इस मामले में सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी संस्थानों में बड़े स्तर की खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और वित्तीय नियमों का पालन बेहद जरूरी होता है। किसी भी तरह की अनियमितता सरकारी व्यवस्था और सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल खड़े कर सकती है।
पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड से जुड़े अधिकारियों की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मामलों का असर राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है, खासकर जब जांच में बड़े नाम सामने आते हैं।
पंजाब में हाल के समय में विभिन्न आर्थिक और प्रशासनिक मामलों में जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ी है।
फिलहाल, ED की जांच जारी है और एजेंसी की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। आने वाले दिनों में मामले में और खुलासे या पूछताछ होने की संभावना जताई जा रही है।
यह घटनाक्रम सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को फिर से चर्चा के केंद्र में ला रहा है।
