25 मई 2026 : पंजाब में आवारा कुत्तों के हमलों से जुड़ी शिकायतों में बढ़ोतरी के बाद नसबंदी अभियान और पशु नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। विभिन्न शहरों और कस्बों से डॉग अटैक की घटनाएं सामने आने के बाद प्रशासन और स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, कई इलाकों में लोगों ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और हमलों को लेकर चिंता जताई है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर नागरिकों में भय का माहौल बताया जा रहा है।
पंजाब स्थानीय निकाय विभाग और नगर निकायों द्वारा चलाए जा रहे नसबंदी अभियानों की प्रभावशीलता पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ क्षेत्रों में पर्याप्त नसबंदी और टीकाकरण न होने की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं, कई विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नसबंदी अभियान पर्याप्त नहीं होता, बल्कि कचरा प्रबंधन और पशु निगरानी भी जरूरी है।
पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए Animal Birth Control (ABC) कार्यक्रम को व्यवस्थित और लगातार चलाना आवश्यक होता है।
भारत में सुप्रीम कोर्ट और पशु कल्याण से जुड़े नियमों के तहत आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए मानक दिशा-निर्देश बनाए गए हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई इलाकों में रात के समय डॉग अटैक की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में दिक्कत हो रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आवारा पशुओं की समस्या केवल पशु नियंत्रण का मुद्दा नहीं, बल्कि शहरी प्रबंधन, कचरा निस्तारण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है।
पशु कल्याण बोर्ड समय-समय पर राज्यों और स्थानीय निकायों को पशु नियंत्रण और टीकाकरण संबंधी दिशानिर्देश जारी करता रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रेबीज संक्रमण के खतरे को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने और काटने की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी है।
फिलहाल, कई स्थानीय निकाय डॉग अटैक शिकायतों की समीक्षा कर रहे हैं और नसबंदी तथा टीकाकरण अभियान तेज करने की तैयारी की जा रही है।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि शहरी क्षेत्रों में आवारा पशुओं के प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
