1 अगस्त, 2026 : पंजाब में फसल विविधीकरण के सरकारी प्रयासों के बावजूद बड़ी संख्या में किसान कपास की खेती छोड़कर फिर से धान (पैडी) की ओर लौट रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कपास की खेती में बढ़ते जोखिम, कीट प्रकोप, उत्पादन लागत और अनिश्चित आय के कारण किसान धान को अधिक सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
राज्य सरकार लंबे समय से किसानों को धान के बजाय वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, ताकि भूजल संरक्षण और कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल सके। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में कई किसानों ने कपास का रकबा घटाकर धान की खेती बढ़ा दी है।
किसान धान को क्यों दे रहे प्राथमिकता?
विशेषज्ञों के अनुसार, धान की सरकारी खरीद, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी और तय बाजार उपलब्ध होने के कारण किसान इसे अपेक्षाकृत कम जोखिम वाली फसल मानते हैं। दूसरी ओर कपास की फसल को कीटों, मौसम और बाजार भाव में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है।
फसल विविधीकरण की चुनौती
कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि किसानों को वैकल्पिक फसलों पर बेहतर आर्थिक सुरक्षा, खरीद व्यवस्था और तकनीकी सहायता नहीं मिलेगी, तो फसल विविधीकरण का लक्ष्य हासिल करना कठिन होगा।
विशेषज्ञों ने सुझाए उपाय
विशेषज्ञों का मानना है कि कपास और अन्य वैकल्पिक फसलों के लिए बेहतर मूल्य, प्रभावी बीमा, समय पर मुआवजा और मजबूत विपणन व्यवस्था उपलब्ध कराकर किसानों को विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
