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Haryana में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जल्द पटरी पर, 140 KM की रफ्तार

जींद 03 जनवरी 2025 : देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन वीरवार की शाम को यहां पहुंच गई। जींद-सोनीपत रूट पर ये ट्रेन चलेगी। इसी माह के अंत तक पटरी पर आने की उम्मीद है। चेन्नई की इंटीग्रल फैक्ट्री में तैयार की गई ये ट्रेन दिल्ली के शकूरबस्ती स्टेशन पर खड़ी थी। जहां से दिल्ली-बठिंडा रेल ट्रैक से होते ये ट्रेन जींद पहुंची है।

ट्रेन में दो डीपीसी (ड्राइवर पावर कार) और आठ यात्री बोगियां हैं। जल्द ही जींद रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का लोड चेक के लिए फाइनल ट्रायल होगा। उसके बाद रेलवे आरडीएसओ (रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन) और ग्रीन एच कंपनी के अधिकारी रिपोर्ट बनाएंगे। इस रिपोर्ट पर पीएमओ से मंजूरी मिलने के बाद ट्रेन का संचालन शुरू हो जाएगा। ये ट्रेन 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी। रेलवे का ये पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो देश में बाकी जगहों पर भी हाइड्रोजन ट्रेन चलाई जाएंगी। ट्रेन में एक बार में 2,638 यात्री सफर कर सकेंगे। हैदराबाद स्थित रेलवे की मेधा सर्वो ड्राइव्स कंपनी ने हाइड्रोजन स्टेशन बनाने और रुफ्यूलिंग के लिए ग्रीन एच इलेक्ट्रोलिसिस के साथ अनुबंध किया हुआ है।

ग्रीन एच द्वारा झज्जर में संयंत्र से हाइड्रोजन उत्पादन से संबंधित माल सप्लाई किया जाएगा। अभी तक दूसरे देशों में 500 से 600 हार्सपावर की क्षमता वाली हाइड्रोजन ट्रेन बनाई गई हैं। इस ट्रेन के लिए हाइड्रोजन ट्रेन में 1200 हार्सपावर की क्षमता वाला इंजन तैयार किया गया है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल द्वारा संचालित ये ट्रेन डीजल ट्रेनों के विपरीत इमिशन के रूप में सिर्फ पानी और हीट जनरेट करती हैं। यह ट्रेन पारंपरिक डीजल ट्रेनों का एक पर्यावरण एवं अनुकूल विकल्प है। जो शून्य कार्बन उत्सर्जन करती है। इसके इंजन धुएं के बजाय पानी व भाप छोड़ेंगे, जिससे प्रदषण नहीं फैलेगा। हाइड्रोजन ट्रेन में आवाज नहीं होगी। जींद से सोनीपत की दूरी लगभग 89 किलोमीटर है।

 
120 करोड़ से जींद में बनाया हाइड्रोजन प्लांट
जींद जंक्शन पर करीब 120 करोड़ रुपये से दो हजार वर्ग मीटर एरिया में बनाए हाइड्रोजन गैस प्लांट में टेस्टिंग का काम चल रहा है। इसमें 10 दिन का समय लगेगा। प्लांट में जमीन के नीचे हाइड्रोजन गैस का भंडारण तैयार किया गया है। इसमें लगभग तीन हजार किलोग्राम गैस भंडारण की क्षमता है। प्लांट को हर घंटे 40 हजार लीटर पानी की जरूरत होगी। स्टेशन की छतों का वर्षा का पानी भी प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। हाइड्रोजन गैस और आक्सीजन को अलग करने के बाद वेस्ट पानी का प्रयोग रेलवे कोचों की सफाई व सिंचाई में प्रयोग किया जा सकेगा।

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